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रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य यजमान बने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी



रवि मौर्य

अयोध्या । रामलला की प्राण प्रतिष्ठा  मुख्य यजमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा सोमवार को किया गया। उन्होंने राम मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना की। 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “सियावर रामचंद्र की जय… आज हमारे राम आ गए हैं।”


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “इस शुभ घड़ी की आप सभी और समस्त देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। मैं अभी गर्भगृह में ऐश्वर्य चेतना का साक्षी बनकर आप सबके सामने उपस्थित हुआ हूं। कितना कुछ कहने को है लेकिन कंठ अवरुद्ध है।”श्री मोदी न कहा, “हमारे राम लला अब टेंट में नहीं रहेंगे, वे अब दिव्य मंदिर में रहेंगे। मेरा पक्का विश्वास है कि जो घटित हुआ है उसकी अनुभूति देश और दुनिया के कोने-कोने में रामभक्तों को हो रही होगी। यह क्षण अलौकिक है… यह माहौल, यह घड़ी हम सब पर प्रभु श्री राम का आशीर्वाद है।”मंदिर वहीं बनाया है।




  प्राण प्रतिष्ठा के बाद यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज भावना ऐसी है जिसके लिए शब्द नहीं मिल रहे। मन भावुक है। निश्चित रूप से आप सब भी ऐसा ही महसूस कर रहे होंगे।

उन्होंने कहा कि आज देश का हर नगर और गांव अयोध्या धाम है, हर मार्ग श्रीरामजन्मभूमि की ओर आ रहा है। हर मन में राम-राम है। रोम-रोम में राम रमे हैं। पूरा राष्ट्र राममय है। ऐसा लगता है कि हम त्रेतायुग में आ गए हैं। आज रघुनंदन राघव रामलला सिंहासन पर विराज रहे हैं। आखिर भारत को इसी दिन की प्रतीक्षा थी। भाव-विभोर कर देने वाले इंतजार में लगभग पांच शताब्दी व्यतीत हो गई।

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई, जिसमें मुख्य यजमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विश्व में पहला ऐसा प्रकरण होगा, जिसमें किसी देश के बहुसंख्यक समाज ने अपने ही देश में अपने आराध्य की जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण के लिए इतने सालों और इतने स्तरों तक लड़ाई लड़ी हो। आज आत्मा प्रफुल्लित है कि मंदिर वहीं बना है, जहां बनाने का संकल्प लिया है।

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई, जिसमें मुख्य यजमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नई अयोध्या में पुरातन संस्कृति और सभ्यता का संरक्षण हो रहा है। साथ ही, भविष्य को देखते हुए सभी सुविधाएं भी विकसित हो रही हैं। इस नगरी को पीएम मोदी के प्रेरणा से सोलर सिटी के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। यह विश्व के सनातन आस्था वालों, संतों, पर्यटकों आदि के प्रमुख केंद्र के रूप में इसे बनाने के लिए अग्रसर किया जा रहा है। यह लोकआस्था और जनविश्वास का विजय है। भारत के गौरव का पुर्नप्रतिष्ठा है।

 हर मन में राम नाम हैं।  हर आंख हर्ष और संतोष के आंसू से भीगा है। हर जिह्वा राम-राम जप रही है। रोम रोम में राम रमे हैं। पूरा राष्ट्र राममय है। ऐसा लगता है हम त्रेतायुग में आ गए हैं।



आज रघुनन्दन राघव रामलला,  हमारे हृदय के भावों से भरे संकल्‍प स्‍वरूप सिंहासन पर विराज रहे हैं। आज हर रामभक्त के हृदय में प्रसन्नता है, गर्व है और संतोष के भाव हैं।

आखिर भारत को इसी दिन की तो प्रतीक्षा थी। भाव-विभोर कर देने वाली इस दिन की प्रतीक्षा में लगभग पांच शताब्दियाँ व्‍यतीत हो गईं, दर्जनों पीढियां अधूरी कामना लिए इस धराधाम से साकेतधाम में लीन हो गईं, किन्‍तु प्रतीक्षा और संघर्ष का क्रम सतत जारी रहा। 

 सन्यासियों, संतों, पुजारियों, नागाओं, निहंगों, बुद्धिजीवियों, राजनेताओं, वनवासियों सहित समाज के हर वर्ग ने जाति-पाँति, विचार- दर्शन, उपासना पद्धति से ऊपर उठकर राम काज के लिए स्वयं का उत्सर्ग किया। 

अंततः आज वह शुभ अवसर आ ही गया कि जब कोटि-कोटि सनातनी आस्‍थावानों के त्‍याग और तप को पूर्णता प्राप्त हो रही है। आज संतोष इस बात का भी है कि मंदिर वहीं बना है, जहाँ बनाने का संकल्प लिया था।

संकल्प और साधना की सिद्धि के लिए, हमारी प्रतीक्षा की समाप्ति के लिए, हमारे संकल्प पूर्णता के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का हृदय से आभार और अभिनंदन। 

 प्रधानमंत्री 2014 में आपके 'आगमन' के साथ ही भारतीय जनमानस कह उठा था...                             

मोरे जियँ भरोस दृढ़ सोई।

मिलिहहिं राम सगुन सुभ होई॥

अभी गर्भगृह में वैदिक विधि-विधान से रामलला के बाल विग्रह के प्राण-प्रतिष्ठा के हम सभी साक्षी बने।

 अलौकिक छवि है हमारे प्रभु की। बिल्कुल वैसे, जैसा संत तुलसीदास जी ने वर्णन किया है...

*नवकंज लोचन। कंज मुख। कर कंज। पद कन्जारुणम्।

धन्य है वह शिल्पी, जिसने हमारे मन में बसे राम की छवि को मूर्त रूप प्रदान किया।

 विचारों और भावनाओं की विह्वलता के बीच मुझे पूज्य संतों और अपनी गुरु परम्परा का पुण्‍य स्‍मरण हो रहा है। आज उनकी आत्मा को असीम संतोष और आनन्द की अनुभूति हो रही होगी, जिन परम्पराओं की पीढ़ियां श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ में अपनी आहुति दे चुकी हैं, उनकी पावन स्मृति को यहां पर कोटि-कोटि नमन करता हूँ।

श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति महायज्ञ न केवल सनातन आस्था व विश्वास की परीक्षा का काल रहा, बल्कि, संपूर्ण भारत को एकात्मकता के सूत्र में बांधने के लिए राष्ट्र की सामूहिक चेतना जागरण के ध्येय में भी सफल सिद्ध हुआ।

जिस अयोध्या को "अवनि की अमरावती" और "धरती का वैकुंठ" कहा गया, वह सदियों तक अभिशिप्त रही। उपेक्षित रही। सुनियोजित तिरस्कार झेलती रही। अपनी ही भूमि पर सनातन आस्था पददलित होती रही, चोटिल होती रही।

 किंतु राम का जीवन हमें संयम की शिक्षा देता है और भारतीय समाज ने संयम बनाये रखा। लेकिन हर एक नए दिन के साथ हमारा संकल्प और दृढ़ होता गया।

और आज देखिए... पूरी दुनिया अयोध्या जी के वैभव को निहार रही है। हर कोई अयोध्या आने को आतुर है।

आज अयोध्या में त्रेतायुगीन वैभव उतर आया है। दिख रहा है। यह धर्म नगरी 'विश्व की सांस्कृतिक राजधानी' के रूप में प्रतिष्ठित हो रही है। पूरा विश्व दिव्य और भव्य अयोध्या का साक्षात्कार कर रहा है।

आज जिस सुनियोजित एवं तीव्र गति से अयोध्यापुरी का विकास हो रहा है, वह प्रधानमंत्री जी के दृढ़संकल्प, इच्छाशक्ति एवं दूरदर्शिता के बिना संभव नहीं था। 

 कुछ वर्षों पहले तक यह कल्पना से परे था कि अयोध्या में एयरपोर्ट होगा। यहां नगर के भीतर 04 लेन सड़क होगी। सरयू जी में क्रूज चलेंगे। अयोध्या की खोई गरिमा वापस आएगी। लेकिन मित्रों! डबल इंजन सरकार के प्रयासों से यह सब सपना साकार हो रहा है। 

 "सांस्कृतिक अयोध्या, आयुष्मान अयोध्या, स्वच्छ अयोध्या, सक्षम अयोध्या, सुरम्य अयोध्या, सुगम्य अयोध्या, दिव्य अयोध्या और भव्य अयोध्या" के रूप में पुनरोद्धार के लिए हजारों करोड़ करोड़ रुपये लग रहे हैं। 

 आज यहां राम जी की पैड़ी, नया घाट, गुप्तार घाट, ब्रम्हकुंड, आदि विभिन्न कुंडों के कायाकल्प, संरक्षण, संचालन और रखरखाव का कार्य हो रहा है। रामायण परंपरा की 'कल्चरल मैपिंग' कराई जा रही है, राम वन गमन पथ पर रामायण वीथिकाओं का निर्माण हो रहा है। 

 नई अयोध्या पूरे विश्व के सनातन आस्थावानों, संतों, पर्यटकों, शोधार्थियों, जिज्ञासुओं के लिए प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

 यह एक नगर या तीर्थ भर का विकास नहीं है, यह उस विश्वास की विजय है, जिसे 'सत्यमेव जयते' के रूप में भारत के राजचिह्न में अंगीकार किया गया है। यह लोकआस्था- जन विश्वास की विजय है। भारत के गौरव की पुनरप्रतिष्ठा है।

अयोध्या का दिव्य दीपोत्सव नए भारत की सांस्कृतिक पहचान बन रहा है और श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्‍ठा समारोह भारत की सांस्‍कृतिक अन्‍तरात्‍मा की समरस अभिव्‍यक्ति सिद्ध हो रहा।



सीएम योगी ने प्रधानमंत्री व सर संघचालक को भेंट किया राम मंदिर का रजत मॉडल 



 इस ऐतिहासिक अवसर पर पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आर एस एस प्रमुख मोहन भागवत महामहिम राज्यपाल आनंदी बेन सन्तों महन्थों  सहित कई फिल्मी जगत की हस्तियां मौजूद रहे जिसमें सुपरस्टार अमिताभ बच्चन रजनीकांत हेमा मालिनी रामायण सीरियल के राम जानेमाने अभिनेता अरुण गोविल दीपिका सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका अभिनेत्री कंगना रनौत अभिनेता विवेक ओबेरॉय   अभिनेता अनुपमखेर प्रख्यात कबि कुमार विश्वास पद्मश्री अभिनेता पोपट लाल प्रख्यात गायिका अनुराधा पौडवाल सोनू निगम आदि नामचीन हस्तियों ने शिरकत की अभिनेत्री कंगना रनौत ने कई बार जय श्रीराम का उद्घोष कर नारे। राम मंदिर आंदोलन की सक्रिय भूमिका निभाने वाली उमा भारती ऋतंभरा जब एक दूसरे को मिली तो बहुत-बहुत हो गई। वर्ष 1990 में गोलीकांड में शहीद कोलकाता के कोठारी बन्धुओं राम कुमार व शरद कुमार कोठारी की बहन पूर्णिमा कोठारी भी रही उपस्थित। 

 मंदिर निर्माण के उद्घाटन के मौके पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा की गई है।

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