Skip to main content

सदियों बाद कुम्भ में बौद्धों का पहला प्रवेश!

..अपने अतीत के गौरव की ओर लौटता -कुम्भ
  • बौद्ध सम्राट हर्षवर्धन की प्रतिमा की स्थापना..
  • बौद्ध सम्राट हर्षवर्धन के नाम से संग्राहलय के निर्माण की घोषणा हुई..
इस वर्ष महाकुम्भ में बौद्ध धम्म की उपस्थिति रही, यह सदियों बाद कुम्भ में बौद्धों का पहला प्रवेश था। यद्यपि वहां मिश्रित विचारधारा थी फिर भी इस मंच के माध्यम से बौद्धों ने अपना प्रवेश सुनिश्चित किया। अभी यह प्रारम्भ है यदि बौद्ध लोग इस पहल को सतर्कता और सकारात्मक दृष्टि के साथ देखते हैं तो भविष्य में बौद्ध कुम्भ निश्चित ही संवर्धित होगा। 
भारत एक बहु-वैचारिकी का देश है अतः यदि आज बौद्ध लोगों की जहां उपस्थिति नहीं है वहां अपनी उपस्थिति दें, तो निश्चित ही भगवान् बुद्ध की देशना को आम जन मानस तक पहुँचाना आसान होगा। कुछ बिन्दुओं पर लोगों की चिंता जायज है परन्तु मंच पर उपस्थित सभी लोग एक समान नहीं होते। जैसा कि हम जानते हैं कि इस बार कुम्भ में जो बौद्ध महाकुम्भ के नाम से सरकार के संरक्षण में जो आयोजन हुआ उसके अपने राजनैतिक परिणाम को भी ध्यान में रखा गया होगा, परन्तु जागरूक बौद्धों को इस पर ध्यान देने कि आवश्यकता है कि यह पहली बार हुआ है तो भविष्य में लोग अपनी तरफ से भी अपनी उपस्थिति अपनी परम्परा आदि के अनुसार दे सकते हैं। इससे पूर्व की सरकारों के पास भी अवसर था कि वह बौद्ध सम्राट हर्षवर्धन द्वारा प्रारम्भ किए गए इस आयोजन में बौद्धों की उपस्थिति को सुनिश्चित करें, परन्तु यह होने में काफी समय लगा । 
बौद्धों को विचार करना चाहिए कि यदि यह स्थान खाली नहीं छोड़ा गया होता तो कैसे ‘बौद्ध-कुम्भ’ विलुप्तप्राय हो जाता? तो क्या हमेशा ही बौद्ध लोगों को अपने स्थानों को रिक्त छोड़ने की आवश्यकता है? हमें पहले अपनी उपस्थिति देने की आवश्यकता है जिसके बाद हम इसे अपनी परम्परा आदि में परिवर्तित कर सकेंगे। 
घोषणा तो कई हुई है धरातल पर कितनी आती है यह भविष्य तय करेगा, परन्तु बौद्ध महाकुम्भ के आयोजन से कम से कम इसके साथ ही साथ बौद्धों की समस्याओं और संकिसा जैसे अन्य अतिक्रमित बौद्ध स्थलों की मुक्ति तथा उनके विकास पर भी चर्चा हुई। अतः यह सकारात्मक पहल स्वीकार्य योग्य है।

Comments

Popular posts from this blog

दलित सफाई कर्मचारी संगठनों को नहीं मिला निमंत्रण, सरकार पर भेदभाव का आरोप

आठवें वेतन आयोग की बैठक में सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा पर भड़का आक्रोश सफाई कर्मचारियों की समस्याएं वेतन आयोग तक पहुंचने से रोकने का आरोप, नेताओं ने जताई नाराजगी मनोज कुमार मौर्य   आगरा। एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सफाई कर्मचारियों के पाॅव धोकर उनके कार्य और परिश्रम को नमन करते हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार की नौकर शाही उत्तर प्रदेश के सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा करके उन्हें हतोत्साहित कर रही है। यह स्थिति असहनीय है। यह बात उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद इलाहाबादी एवं उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुन्दर बाबू चंचल ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के विशेष सचिव पुष्प राज ने उत्तर प्रदेश शासन वित्त ( वेतन आयोग) अनुभाग-2 संख्या- वे आ०-2-387/ दस- 2026 लखनऊ: 08 जून 2026 के द्वारा शासनादेश जारी करते हुए दिनांक 22-23 जून 2026 को लखनऊ में आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के सदस्य की होने बाली बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के अलग अलग विभागों के 24 कर्म...

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...