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अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कवि महाकुंभ का ऐतिहासिक आयोजन


सीतापुर (बिसवां)
राष्ट्रीय कवि संगम सीतापुर द्वारा  अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कवि महाकुंभ का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। बाबा छोटेलाल बाल विद्यालय परिसर रामाभारी में संपन्न बाबा छोटेलाल स्मृति महोत्सव पर आयोजित कवि महाकुंभ में देश के ख्यातिलब्ध कवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर आयोजन को ऐतिहासिक बनाया। 
राज्यसूचना आयुक्त उत्तर प्रदेश स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता व पूर्व विधायक महेन्द्र प्रताप सिंह यादव ने मां शारदे की प्रतिमा एवं बाबा छोटेलाल लक्ष्मी देवी के चित्रों पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्नाव‌ से पधारी कवियित्री प्रियंका शुक्ला ने प्रस्तुत की। मंच का कुशल एवं सफल संचालन गीतकार संजय सांवरा  ने किया।  

मुख्य अतिथि स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कविता राष्ट्र जागरण व समाज प्रबोधन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने जनसूचना अधिकार पर चर्चा करते हुए कहा कि यह अधिनियम लोकतंत्र को दृढ़ता व जनता को अपार शक्ति देता है जन जन को इसमें प्रदत अधिकार का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने जनसूचना अधिकार की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
विशिष्ट अतिथि महेंद्र सिंह यादव पूर्व विधायक ने गत चालीस वर्षों से आयोजित हो रहे इस समारोह की निरंतरता की सराहना करते हुए संयोजक कमलेश मौर्य मृदु को बधाई दी। 

इस अवसर पर देश‌ के प्रख्यात ओजस्वी कवि अनिल अमल का नागरिक अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भगवती प्रसाद शुक्ल बेधड़क ने की।
कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष ग्राम प्रधान अरबाब अहमद, भाजपा मंडल अध्यक्ष मधुकांत मौर्य, दिव्यांगम सेवा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु कांत मिश्र, कैलाशपति रस्तोगी, अनिल कुमार वर्मा , डा राकेश कुमार, आनन्द खत्री आनंद, मधु इंडिया के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह यादव, अरुणेश अग्रवाल योगेश चौहान, संध्या त्रिपाठी आदि ने उन्हें अभिनंदन स्मृति भेंट प्रदान की। 
इस कवि महाकुंभ में रामकिशोर तिवारी, शिव कुमार व्यास, अजय प्रधान, अनिल अमल, बीपी मिश्र बेधड़क, डॉ शर्मेश  शर्मा, प्रवीण पाण्डेय आवारा, योगेश चौहान, केदारनाथ शुक्ल, जगन्नाथ निर्दोष, चेतराम अज्ञानी, अशोक अग्निपथी संदीप अनुरागी, आशुतोष आशु, सोनी मिश्रा, संध्या त्रिपाठी, पंडित विजय लक्ष्मी, नीतू गुप्ता गयावी, पिंकी प्रजापति, सरोज सरगम   कृष कुमार मौर्य सरल , लवकुश शुक्ला, विनीत तिवारी, जी एल गांधी, विजय तन्हा, रोहित विश्वकर्मा, ब्रजमोहन शुक्ल,श्रीपाल मिश्र,अटल नारायण अटल, विजय रस्तोगी, हरिशंकर मौर्य, विंदु प्रभा तिवारी अजय प्रधान , सूरज सीतापुरी, दीपक सागर ,  अभिमन्यु गंगवार, शशि नारायण त्रिपाठी सहित 60 कवियों ने काव्यपाठ किया । 
इसी क्रम में कीर्तिशेष कवियों   रामलाल सारंग, डा श्याम सुंदर मिश्र मधुप, डा गणेश दत्त सारस्वत, गजराज सिंह यादव अमर, लालजी प्रसाद वर्मा लाल, अफसर बिसवानी, रामकृष्ण संतोष, लवकुश दीक्षित ,  पं चतुर्भुज शर्मा, पं श्रीकांत शर्मा कान्ह, गिरिजा शंकर मिश्र शास्त्री , बैजनाथ प्रसाद रस्तोगी , रजनीश मिश्र दुखिया शंकर लाल वर्मा , लवकुश दीक्षित, मंगल सिंह मंगल, आदित्य अवस्थी दिनेश दादा, चंद्र शेखर सिंह चंद, परसाद गंजरहा, रघुनंदन प्रसाद मौर्य  , पं.अवध बिहारी शुक्ल अवधेश, रामनाथ जलोटा बब्बू,   आशु कवि सोम दीक्षित सोम, 
पं. रामकुमार द्विवेदी विचित्र , डा निर्मला लाल, के डी शर्मा हाहाकारी, काका बैसवारी, श्रीनारायण अग्निहोत्री सनकी स्मृति सम्मान से कवियों को सम्मानित करते हुये अंगवस्त्र व सम्मान पत्र प्रदान किया गया। 
इस अवसर पर विजय तन्हा को लवकुश दीक्षित सम्मान , पत्रकार विष्णु कांत मिश्र को शत्रोहन लाल मौर्य स्मृति सम्मान, वरिष्ठ नागरिक लालजी वर्मा को बाबा छोटेलाल स्मृति सम्मान, वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती नीतू गुप्ता गयावी को जयदेवी स्मृति सम्मान, नवोदित कवयित्री कु प्रियंका शुक्ला को अनीता मौर्य स्मृति सम्मान, समाजसेवी रामगोपाल वर्मा को श्रीमती गंगा देवी स्मृति सम्मान व लंबी चोटी के लिए अमन कश्यप को बाबा रामअवतार दास सम्मान से सम्मानित किया गया। 
बाबा छोटेलाल बाल विद्यालय की ओर से समाजसेवी डा लतीफ अहमद को सम्मानित किया गया। रामनरेश मौर्य पुजारी, मधुकांत मौर्य, रमेशचंद्र मौर्य मुन्ना, मुंशी रामलखन मौर्य, विद्यालय के प्रधानाध्यापक अश्विनी कुमार श्रीवास्तव,दीपू चौहान ने माल्यार्पण कर व बैज लगाकर अतिथि जनों का स्वागत किया। राष्ट्रीय कवि संगम के जिलाध्यक्ष आनन्द खत्री आनंद ने शब्द सुमनों से अतिथियों सहित कवियों व उपस्थित श्रोताओं का स्वागत किया । 
कार्यक्रम संयोजक व संस्था के राष्ट्रीय मंत्री साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया। इस समारोह में रूपेश अवस्थी, बलराम सिंह वर्मा , कुलदीप सिंह यादव , ओमप्रकाश वर्मा , अजीत आर्य , डा नियाज़ तोअहमद सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। कवि महाकुंभ में  ब्रह्म मुहूर्त तक काव्य गंगा प्रवाहमान रही हास्य व्यंग,ओज, श्रृंगार भक्ति रस की नदियों के पवित्र संगम में श्रोताओं ने अवगाहन किया।

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