Skip to main content

डॉ. संतोष कुशवाहा ने लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कर किशोर की जान बचाई

संजय सिंह 

गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ड्रामा और इमरजेंसी में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की शुरुआत की गई है। दुर्घटना में घायल 16 वर्षीय किशोर का लिवर फट गया था। इस तरह के मामले में पहली बार लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कर किशोर की जान बचाई गई है। 

आमतौर पर इस तरह के मामलों में अब तक बड़ा चीरा लगाकर ऑपरेशन किया जाता था जिससे आगे चलकर रोगी अनेक तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता था। 

कुशीनगर के 16 वर्षीय अनिकेत मार्ग दुर्घटना में घायल हो गए थे। उन्हें पहले सीएचसी पिपराइच ले जाया गया वहां से डॉक्टरों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। जब परिजन उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो जांच के बाद पता चला कि लिवर फट गया है। 

आत  में गंभीर चोटे आई है, फेफड़ों में खून भर गया है, सर में भी चोट थी डॉक्टरों ने पहले रोगी को स्थिर किया इसके बाद दूरबीन विधि से छोटा चीरा लगाकर ऑपरेशन किया। लीवर में टांके लगाए गए आत  की मरम्मत की गई, पेट व फेफड़ों से खून निकल गया,  रोगी अब स्वस्थ है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कर उसे अनेक प्रकार की समस्याओं से बचा लिया गया । 

डॉक्टर के अनुसार बड़ा चीरा  लगने से घाव देर से भरता है इसलिए रोगी को अधिक दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। यदि पेट में बड़ा चीरा लगा दिया जाता है तो वह कभी भी भारी वजन नहीं उठा सकता, छोटा चिरा लगने से इन समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है। 

सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर संतोष कुशवाहा ने सर्जरी की और साथ मे उनकी टीम मौजूद रही। गोरखपुर  बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस तरह का यह पहला मामला है।

डॉक्टर संतोष कुशवाहा एसोसिएट प्रोफेसर सर्जरी विभाग बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर ने बताया की स्थिति बेहद गंभीर थी वह बेहोश था। ऐसी स्थिति में बड़ा चीरा लगाकर ऑपरेशन करना ठीक नहीं था इसलिए पहले उसे स्थिर किया गया फिर लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन किया गया ट्रामा एंड इमरजेंसी में मेडिकल कॉलेज में यह पहला प्रयोग था जो सफल रहा। 

Comments

Popular posts from this blog

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

“अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी: उजड़ने की कगार पर संजय कॉलोनी भाटी माइंस”

जितेंद्र कुशवाहा दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित संजय कॉलोनी भाटी माइंस के लोग आज भी अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही कॉलोनी है, जिसे वर्ष 1976 में दिल्ली सरकार ने विधिवत बसाया था और यहां के निवासियों को पट्टे भी दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें एक स्थायी ठिकाना मिल गया है। लोग गांव से आए, मजदूरी की, और जीवनभर की कमाई लगाकर ईंट-पत्थर से अपने आशियाने खड़े किए। लेकिन 1991 में अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी ने यहां के निवासियों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया। अधिकारियों की एक गलत रिपोर्ट और अदूरदर्शी निर्णय के कारण पूरी कॉलोनी को रिज क्षेत्र (संरक्षित वन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि 15 साल पहले जिन घरों को कानूनी मान्यता दी गई थी, वे अचानक “अवैध” हो गए। आज हालात यह हैं कि सरकार और प्रशासन उन्हीं घरों को तोड़ने पर आमादा है, जिन पर लोगों ने अपना खून-पसीना बहाकर जीवन की पूंजी लगा दी थी। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए नव युवक ग्राम विकास समिति के सदस्य एवं ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ के संस्थापक समाज...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...