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सम्राट अशोक सोशल वेलफेयर सोसायटी के तत्व ध्यान में विरोध प्रदर्शन

 



वशिष्ठ मौर्या 


कुशीनगर राज्यपाल महोदय (विहार). द्वारा जिलाधिकारी कुशीनग महाबोधि महाविहार बोधगया पूर्णरूप से बौद्धों को सौपने के सम्बंध में..

  • सम्राट अशोक सोशल वेलफेयर सोसायटी के तत्व ध्यान में विरोध प्रदर्शन..
  • बोधगया मुक्ति आंदोलन..

हम यह पत्र भारत एवं विश्व के बौद्ध अनुयाइयों के तरफ से दे रहे हैं। महाबोधि मंदिर बोधगया के प्रबंधन को लेकर गहरी बिंता और असंतोष व्यक्त कर रहे है। विदित है महाबोधि मंदिर दुनिया के बीच उपस्थापको के लिए सबसे पवित्र स्थल है। जहाँ भगवान बुद्ध को पीपल वृक्ष के नीचे संबोधि प्राप्त हुई अर्थात बुद्ध बने। ज्ञान की धरती, सम्बोधि की धरती, बोधिवृक्ष की धरती, प्रज्ञा की धरती, शास्ता की धरती। 


यह स्थान न केवल भारतीय संस्कृति और विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, अपितु दुनिया के करोड़ो बौद्ध बद्धालुओं के आस्या का केन्द्र भी है 1. महाबोधि मंदिर प्रबंधन का मुद्दा- महाबोधि मंदिर निर्माण धम्मराजा प्रियदर्शी अशोक महान ने कराया, समय-समय पर बौद्ध राजाओं एवं बौद्ध भिक्षुओं द्वारा जीर्णोद्वार एवं प्रबंधन होता रहा। बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 के तहत गठित बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (BTMC) में 9 सदस्य होते है। जिसमें केवल 4 बौद्ध सदस्य होते, शेष हिन्दू धर्मावलम्वी बनाये जाते है। 
मया जिला के जिलाधिकारी इस समिति के अध्यक्ष होते है, अगर वह हिन्दू हो तो । 2. अनुच्छेद 249 के तहत बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 को समाप्त करने की मांग:- संविधान के अनुच्छेद 249 के तहत बौद्ध अनुयायी यह मांग कर रहे है कि इस अधिनियम को निरस्त किया जाए और मंदिर का प्रबंधन पूरी तरह से बौद्धों को सौपा जाए। 
सभी धर्मालम्बियों के धार्मिक स्थल उनके नियंत्रण में है, फिर महाबोधि महाविहार से भेदभाव क्यो3. मंदिर प्रबंधन में अनियमितायें एवं बौद्धों के दान का दुरूपयोग मंदिर के मौजूदा प्रबंधन घोर अनियमिताओं में घिरा हुआ, मंदिर से आनेवाला दान का अध्यक्ष के द्वारा दुरूपयोग किया जाता है। यहा तैनात प्रबंधन पूरी तरह भ्रष्टाचार में संलिप्त है। जाँच होनी चाहिए भ्रष्टवारियो को कड़ी सजा दे जेल भेजना चाहिए। 4. हमारी पूजा विधि आस्था से खिलवाड़ 


यहा काम करने वाले लोग ज्यादातर नशा का प्रयोग करते हैं, विदेशियो से जबरजस्ती धन उगाही करते हैं। पूजा करने में व्यवधान उत्पन्न करते है, एकतरह से कहे प्रबंधन के द्वारा महाबोधि मंदिर ठेकेदारों के हवाले कर दिया गया। जिससे हमारी परंपरागत प्रगाओ, मंदीर परिसर, का व्यवसायीकरण से इसकी पवित्रता और धार्मिक गरिमा प्रभावित हो रही है। 5. बौद्ध भिक्षुओ द्वारा धरना प्रदर्शन :- बौद्ध निशुओं द्वारा महाबोधि मंदिर बौद्धों को सौंपने की मांग को लेकर प्रदर्शन और धरना दे रहे है. बौद्ध धर्म के स्थल बौद्धों को सौंप दिया जाय शान्तिवाहक बौद्ध भिक्षुओं पर किसी भी प्रकार से अध्याय किया जाए। 

 परासांह, टोला र. बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 को निरस्त किया जाए महाबोधि महाविहार का पूर्ण आधिपत्य बौद्धी को सौपा जाए ।

मंदिर प्रबंधन से गैर बौद्धौ का हस्तक्षेप समाप्त किया जाय जिससे बौद्धों की धार्मिक पवित्रता बनी रहे 3. मंदिर प्रबंधन में बौद्ध पुजारियो/भिक्षुओ की भूमिका हो।

सरकार इस मुद्दे पर संवैधानिक दृष्टिकोण से निर्णय लेते हुए बौद्धो को वयाशीर्घ महाबोधि प्रर्वधन सौंपने का कार्य करे। न्यायप्रिय शासन व्यवस्या से न्याय के सकारात्मक निर्णय की प्रतीक्षा में. सैकड़ो की संख्या में लोग वहां उपस्थित थे संरक्षक संयोजक डॉ. भिक्षु नन्दरतन महाथेरो एवं समस्त भिक्षु संघ, जनपदवासी । 

डा०मिशु नन्दस्ता समस्त बौद्ध शिशु राण एवं जनपदवासी कुशीनगर भन्ते संथदीप - भनो दीक्षानन्द. भन्तधर्म डीर  धनन्द भन्त, डॉ० करुणा भन्तेस, वरू प्रसाद बीई , कन्हैया मौथा सोहन, राबतेन्द्र लिक परेलश्या, मबदन कुशवाहा, सत्य नारायण कुशवाहा,  रामप्रताप कुश्वाहा,पारसनाथ कुशवाहा  पृजना, नन्द‌किशोर कुशवाहा कुडलवाना, रामचदर कुशवाहा ।

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