- स्वतंत्रता सेनानी ने देश व परिवार के लिए दिए बलिदान.
- नाट्यप्रस्तुति देख शिक्षक, छात्र छात्राएं हुए भावुक..
मुंशी प्रेमचंद की कहानियां इतने सरल संवेदनशील और दिल को छू लेने वाली लगती हैं कि पढ़ते ही इन्हें मंचन करने का मन करता है इसलिए जितना मंचन इनकी कहानियों का हुआ है शायद ही किसी अन्य लेखक की कहानियों का हुआ होगा ।
ऐसी ही एक कहानी है मां।
करुणा (डॉ सीमा मोदी) आज सात वर्ष की सज़ा काट कर लौट रहे अपने स्वतंत्रता सेनानी पति (नवनीत मिश्रा) आदित्य की प्रतीक्षा कर रही है उसकी कल्पना है कि हजारों की भीड़ उसे इंकलाब जिंदाबाद के नारों के साथ ससम्मान लेकर आ रही होगी, किंतु घर लौटता है दुर्बल बीमार ,अकेला, आदित्य, जो उसी रात अपने पुत्र प्रकाश को भी उसके जैसा स्वतंत्रता सेनानी बनाने का स्वप्न देखकर दम तोड़ देता है।
करुणा अपने दुख को समेटते हुए वायदा करती है कि वो अपने पुत्र को भी अपने पिता की तरह ही देश सेवा के लिए प्रेरित करेगी। उसे भी देश के लिए प्राण न्योछावर करने की प्रेरणा देगी।
नाट्यप्रस्तुति में माँ बनी करुणा की भूमिका निभाई रंगमंच कलाकार व अभिनेत्री सीमा मोदी, क्रांतिकारी बने पति की भूमिका निभाई रंगमंच कलाकर व फ़िल्म अभिनेता नवनीत मिश्रा ने।
अन्य स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारियों की भूमिका निभाई नॉमिश्म, आश्विक, तान्या, आरुषि, दीक्षा, राधा रानी, अनामिका यादव, सविता, लविश, हर्षित, लकमी, लहर, अंजुली, अंचल, लतिका रहे।
सीमा मोदी जी कहती हैं ये ऐसी कहानी है जिसका मंचन वो देश के विभिन्न शहरों में स्कूल , कॉलेज व गाँव , शहर में करते आ रही हैऔर आगे भी करेंगी और इस नाटक के माध्यम से देश प्रेम, सामाजिक दायित्व, पारिवारिक महत्व के प्रति जागरूकता फैला रही है।
नाट्यलेखन व नाट्यनरूपन्त्रकार श्री के के अग्रवाल जी ने किया। स्कूल के प्रधानाचार्य प्रेम चंद, शिक्षक नफीस फातमा, पुष्पेंद्र कुमार ववर्मा, शालिनी तिवारी, सरिता वर्मा, स्मिता श्रीवास्तव मौज़ूद रहे।



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