लखनऊ। राष्ट्रीय कवि संगम, राष्ट्रीय एकता मिशन, राष्ट्रीय सेवा संगठन, राष्ट्रीय सेविका समिति एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ के नाका हिंडोला क्षेत्र स्थित स्वामी श्री हरि चरण दास आश्रम (जगत कुटी) में भारतीय नववर्ष अभिनन्दन समारोह का भव्य आयोजन मारुति नन्दन सेवा समिति द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय मंत्री साहित्य भूषण श्री कमलेश मौर्य 'मृदु' के मार्गदर्शन में काव्य समारोह भी आयोजित हुआ।
इस समारोह की अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद की लखनऊ महानगर इकाई के अध्यक्ष श्री निर्भय नारायण गुप्त ने की मुख्य अतिथि की भूमिका में संस्कार भारती अवधप्रांत के कार्यकारी अध्यक्ष सीताराम कश्यप रहे। विशिष्ट अतिथि द्वय के रूप में लोक भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विजय बहादुर सिंह एवं डॉ. अमिय अग्रवाल (केजीएमयू) रहे। संस्कार भारती की लखनऊ महानगर इकाई के महामंत्री डा अशोक कुमार सिंह गौतम की कार्यक्रम में सतत सक्रियता रही।
आश्रम की ओर से स्वामी मुरारी दास वैष्णव जी एवं उनके सहयोगी श्री राजेंद्र सक्सेना का तथा संस्कार भारती के प्रांतीय मंत्री धर्मेंद्र सिंह व संस्कार भारती प्रदेश कार्यालय व्यवस्थापक दिनेश सिंह का निरन्तर सान्निध्य बना रहा। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री श्री गिरीश चन्द्र मिश्रा जी की मंच पर विशेष उपस्थिति रही।
काव्य समारोह का सुंदर सुरुचि पूर्ण संचालन अखिल भारतीय साहित्य परिषद की लखनऊ महानगर इकाई की महामंत्री डॉ ममता पंकज ने किया।
कार्यक्रम का आरम्भ लता श्रीवास्तव की सुन्दर वाणी वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे निर्भय नारायण गुप्त ने हिंदू जागरण से संबंधित पंक्तियों को प्रभावशाली ढँग से रखा
सुनो हिन्दुओं कब बदलोगे, कब हिन्दू हो पाओगे
बिखरे बँटे जातियों में तुम, खुद को स्वयं मिटाओगे
विशिष्ट अतिथि डॉक्टर अमिय अग्रवाल ने तिरंगे की व्याख्या करते हुए कहा
- मैं स्वयं त्रिवर्णीय उच्च केतु
- मध्यस्थ उदधि सा श्वेत सेतु
- हरियाली है आधार मेरा
- केसरिया बाना भाल मेरा
श्री कमलेश मौर्य मृदु ने सनातन संस्कृति को प्रमुखता से रखते हुए कहा
- नव वर्ष में हर्ष मिले सबको इस राष्ट्र को कीर्ति अपार मिले.
- जिन्हें राष्ट्र की अस्मिता से नहीं प्यार उन्हें तगड़ी फटकार मिले.
- अयोध्या की तरह मथुरा और काशी अटाला पे भी अधिकार मिले.
- अपनी इस सनातन संस्कृति की" मृदु" विश्व में जय-जयकार मिले.
वरिष्ठ कवि कुमार तरल ने लोक भाषा अवधी में पंक्तियाँ कहीं
- जागी जिया मां हिलोर,
- सोचत सोचत होइगा भोर
- देखेन मैया की ओर जे लिखाई रचना
काव्य समारोह के संयोजक राजीव 'वत्सल' ने ईश्वर की महिमा को रेखांकित करते हुए कहा
- नियति नियंता करे नियत सब हम केवल कठपुतली उसकी
- कैसे किसको क्या क्या करना सूत्र उसी का उँगली उसकी
- यह जग सारा रंगमंच सा बाहर हो ही जाना हमको
- थिरकन अपनी वही रोकता राग उसी का ढपली उसकी
- छन्दकार विपुल मिश्रा ने अपनी कामना को ऐसे शब्दों में व्यक्त किया
- जहां प्राण प्यारे राम प्रभु का सदन बना
- मन वहां जाने को तरसता है आठों याम
- जहाँ है निवास रघुनन्दन निकन्दन का
- बनवा लूँ अपना भी प्रभु के निकट धाम
- उमेश आदित्य ने भी प्रभु राम की महिमा को गाया
- राम एहसास है राम विश्वास हैं
ध्यान करते ही सबसे अधिक पास हैं
श्रीपति रस्तोगी ने देशभक्ति के भाव से ओतप्रोत रचना पढ़ी
- लेखनी दे रही देशभक्ति का संदेश
- सदा सर्वदा अग्रणी मेरा भारत देश
- महेश चन्द्र गुप्ता 'महेश' ने भी राष्ट्र वन्दन की पंक्तियाँ पढीं
- बहे प्रेम की गंग में संस्कृति का हो मान
- विश्व गुरू फिर से बने बढ़े राष्ट्र सम्मान
- सुधा सिंह ने शबरी की प्रतीक्षा को व्यक्त किया
- हुआ शबरी का पूरा इंतजार
- अयोध्या में राम आए हैं
राम तिलक मौर्य रसराज ने ईद और होली दोनों को व्यक्त किया दूर बैठा क्यों है पास आ जा
- ईद होली के दिन तो गले मिलने आ जा
- शिखा सिंह प्रज्ञा ने सम्बन्धों की नकारात्मकता पर कहा
- रिश्ते बदल जाते हैं हालात बदल जाते हैं
- चाहने वालों के जज़्बात बदल जाते हैं
लता श्रीवास्तव ने देश के नाम को ऊंचा करने की बात कही
- सारे संसार में भारत का ऊँचा नाम हो जाए
- कि हर बेटी बने सीता और बेटा राम हो जाए
अतुल बाजपेई 'प्रियदर्शी' ने ऋतु परिवर्तन को कुछ इस अंदाज़ में कहा
- होने लगा दिन बड़ा धूप में भी तेजी आई
- लगता है शीत काल का ये अन्त आ गया
काव्य समारोह के पश्चात संस्कार भारती की ओर से गीत संगीत व नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ समारोह का समापन हुआ। अंत में सभीने मिलकर आपस में फूलों की होली खेलते हुए एक दूसरे को होली व नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।


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