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भ्रष्टाचार की जांच के नाम पर अधिकारी करते हैं लीपापोती

ब्लॉकों में तैनात एपीओ और तकनीकी सहायकों ने मनरेगा योजना को बना दिया अवैध कमाई का जरिया

लखनऊ । जिले के हर विकासखंड की कुछ ग्राम पंचायतों में तैनात ग्राम रोजगार सेवकों द्वारा विकास खंडों में तैनात अतिरिक्त मनरेगा अधिकारियों और तकनीकी सहायकों की कमीशन खोरी के चलते मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार चरम पर है। भ्रष्टाचार का एक अंधेर नगरी चौपट राज वाला नमूना मलिहाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत महदोईया में देखने को मिला। यहां वर्षों से जिस तरह कागजों में मजदूरों की हाजिरी लगाकर सरकारी धन की मनमानी लूट की जा रही है उसी का नतीजा है कि कभी जमीन पर एक भी मजदूर ना होने के बावजूद कागजों में फर्जी हाजिरी लगाई जाती है और कभी नौ मजदूर  मौके पर काम करते हैं और हाजिरी 27 की लगा दी जाती है। 18 मजदूर जो काम पर नहीं आते हैं उनके खाते में पैसा लगाकर रोजगार सेवक ₹200 उस व्यक्ति को दे देते हैं और शेष राशि उससे वापस ले लेते हैं। इस घटना का ताजा प्रमाण 4 मार्च को मनरेगा योजना की वेबसाइट पर अपलोड की गई मजदूरों की फोटो से पता चलता है। इस पंचायत में यह खेल वर्षों से चल रहा है और रोजगार सेवक हर महीने लाखों की अवैध कमाई कर रहा है जिससे आज वह रसूखदार बन गया है जिसके बल पर वह अधिकारियों पर भी तरह-तरह के दबाव बनाता रहता है साथ ही अवैध वसूली का हिस्सा ब्लॉक में तैनात अधिकारियों को भी देता है जिसके परिणाम स्वरूप पिछले कई महीनों में भ्रष्टाचार की कई खबरें प्रकाशित की गई परंतु विकास खंड मैं तैनात अधिकारियों ने भ्रष्टाचार की रकम का हिस्सा बांट कर लिया और भ्रष्टाचारियों को क्लीन चिट दे दी इसी तरह कई अन्य पंचायत में भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं लेकिन अभी तक न किसी तकनीकी सहायक के खिलाफ कार्रवाई की गई और न ही एपीओ तथा रोजगार सेवक के खिलाफ की कार्रवाई हुई है। इससे साफ पता चलता है कि ब्लॉक से लेकर कुछ अन्य अधिकारी भी भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रहे हैं। यहां दी गई फोटो से आप मनरेगा मजदूरों की गिनती कर सकते हैं और आप खुद बता सकते हैं कि इसमें 27 मजदूर हैं या 9 मजदूरों की ही फोटो को चार बार चिपका दिया गया है।

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