लेखराम मौर्य
लखनऊ/ उन्नाव। उन्नाव जनपद के नवाबगंज ब्लॉक के बाद और विकासखंड औरस की कई पंचायतों में मनरेगा योजना ग्राम प्रधानों, सचिवों और ग्राम रोजगार सेवकों के लिए बिना कुछ किये लूट का जरिया बन चुकी है।
मनरेगा योजना में अंधेर नगरी चौपट राज का खेल खुलेआम चल रहा है क्योंकि शिकायतों के बाद भी अधिकारियों द्वारा भ्रष्ट कर्मचारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है जिससे उनके हौसले और बुलंद हैं।विकासखंड औरास की ग्राम पंचायत भुड़कुड़ी में रहीमाबाद औरास रोड से कनवाखेड़ा, थरिया संपर्क मार्ग तक कच्चा मार्ग निर्माण मनरेगा योजना के तहत बनाया जा रहा है लेकिन इसमें 32 लेबरों की जगह मात्र 9 लेबरों की फोटो डालकर 32 का पैसा निकाला जा रहा है और काम कहां चल रहा है इसकी जानकारी गांव वालों को भी नहीं है । इसी तरह बैरी पंचायत में 40 लेबर जामुन अली के खेत से प्राइमरी विद्यालय तक पक्का नाला निर्माण कर रहे हैं यहां भी 10 लेबर खड़े करके फोटो खींच ली गई है और नाले का आसपास कहीं पता नहीं है।
इसी प्रकार अहमदपुर कासिमपुर में तीन जगह काम चल रहा है जिसमें नहर से मोबिन के खेत तक नाला खुदाई और नहर से रामलाल के खेत तक नाला खुदाई के अलावा एक जगह इंटरलॉकिंग का कार्य चल रहा है यहां दो जगह के नालों का तो अता-पता नहीं है लेकिन जहां इंटरलॉकिंग बन रही है वहीं पर लेबरों की फोटो खींचकर नालों की जगह भी अपलोड कर दी गई है।यहां जो फोटो डाली गई है उसमें एक फोटो ऐसी है जिसमें कुछ लेबर मोबाइल पर बात कर रहे हैं और किसी के हाथ में फावड़ा आदि नहीं है इससे पता चलता है कि मनरेगा योजना में फर्जी फोटो डाली जा रही है। ग्राम पंचायत जवन में ब्रह्मन तालाब में सिल्टर सफाई का कार्य दिखाया जा रहा है। यहां 30 से अधिक लेबरों की हाजिरी लगाई जा रही है लेकिन सात आठ लोगों को खड़े करके फर्जी फोटो डाली जा रही है जबकि काम कई दिन पहले ही बंद हो चुका है। ग्रामीणों के अनुसार यहां काम नहीं चल रहा है मात्र फोटो खींची जा रही है।
ग्राम पंचायत रामपुर गड़ऊहा में बड़ी नहर से नन्हे सिंह की बाग तक कच्चा निर्माण कार्य दिखाया जा रहा है यहां सबसे गजब का खेल चल रहा है इस पंचायत के ग्राम रोजगार सेवक संदीप पाल ने पिछले दिनों किसी काम की फोटो खिंचवाकर स्टूडियो से निकलवा लिया और उसी को अब मनरेगा योजना में अपलोड कर रहा है।
जबकि ऑनलाइन मौके की फोटो अपलोड करने का आदेश है। यहां लोधई में चल रहे पक्के काम की जानकारी ग्रामीणों को है लेकिन कच्चे काम की जानकारी गांव वालों को भी नहीं है जबकि यहां भी लगभग 30 लेबरों की हाजिरी लगाई जा रही है।
इस तरह मनरेगा योजना में अधिकारियों की कर परस्ती में खुलेआम लूट मची हुई है लेकिन कोई भी अधिकारी देखने और सुनने वाला नहीं है क्योंकि बिना बंदर बांट के ऐसा संभव नहीं है।



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