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अखंड भारत से पाखंड भारत तक?

हम ये कैसा भारत बनाना चाहते हैं?
  • हम आज तक जाति व्यवस्था के आतंक से मुक्त नहीं हुए.
  • यह हमारी असली लड़ाई है..
  • जो आज भी जारी है..
  • ..अंधभक्तों की फौज तैयार हो रही है...?
मनोज मानव

भारत का हजारों वर्षों का इतिहास सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संघर्षों का इतिहास है। 
हमने पहले ब्राह्मणवाद की कुरीतियों से लंबी लड़ाई लड़ी, फिर मुगलों के जुल्म सहे, और अंत में अंग्रेजों की गुलामी से आजादी हासिल की। 
लेकिन सच यह है कि 1947 में देश आजाद हुआ, पर हम आज तक जाति व्यवस्था के आतंक से मुक्त नहीं हुए। यह हमारी असली लड़ाई है, जो आज भी जारी है।
  • आज भी जातीय भेदभाव और उत्पीड़न..
  • हमें चैन से जीने नहीं देता..
जरा सोचिए, जब पशु बलि, नर बलि, दास प्रथा, छुआछूत और जाति प्रथा जैसे अभिशाप हमारी धरती पर हावी थे, तब हमारा दुश्मन कौन था? दो हजार साल से यह जंग चल रही है। 
हमारे महापुरुषों बुद्ध, फुले, आंबेडकर ने हमें इस दलदल से निकाला, बराबरी का हक दिलाया। मगर आज भी जातीय भेदभाव और उत्पीड़न हमें चैन से जीने नहीं देता।
  • स्वतंत्रता संग्राम में एक पन्ने का भी योगदान नहीं, वे आज "अखंड भारत" का ढोंग रच रहे हैं. 
  • यह पाखंड नहीं तो क्या है..
और अब? बीजेपी और आरएसएस दिन-रात भारत के भविष्य को दफन करने में जुटे हैं। ये वही लोग हैं जो ब्राह्मणवाद को पालते-पोसते हैं! 
ये कैसा भारत बनाना चाहते हैं? क्या ये उसी अतीत की "श्रेष्ठता" को लौटाना चाहते हैं, जहाँ बुद्ध की समतावादी विरासत को कुचल दिया गया? तक्षशिला और नालंदा बनवाने वाले बौद्धों की 84 हजार विहारों और स्तूपों को मिट्टी में मिला दिया गया। जिनका स्वतंत्रता संग्राम में एक पन्ने का भी योगदान नहीं, वे आज "अखंड भारत" का ढोंग रच रहे हैं। 
यह पाखंड नहीं तो क्या है? अमेरिका अंतरिक्ष में दो जिंदगियाँ बचाने के लिए अरबों खर्च कर रहा है। और यहाँ? बीजेपी-आरएसएस अतीत की खुदाई कर रही है, नरसंहार की साजिश रच रही है! ये कैसा भारत चाहते हैं? जहाँ युवा बेरोजगार हैं, CMIE के मुताबिक 25% युवा रोजगार के बिना भटक रहे हैं। 
शिक्षा को मिट्टी में मिला दिया, सरकारी स्कूलों की हालत खस्ता, उच्च शिक्षा इतनी महँगी कि 90% लोग उससे वंचित। नतीजा? सिर्फ अंधभक्तों की फौज तैयार हो रही है। Samay rahte सावधान! हो जाइये, ऐसे लोगों के जाल, फरेब और झूठ से बचीये। मुगल बाद में आए, अंग्रेज बाद में आए, मगर दो हजार साल से किससे लड़ रहे हैं, इस पर विचार करिए।अपनी नस्लों को बचाइए, इस चंगुल से आजाद होइए। यही हमारा आह्वान है।

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