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अयोध्या के पवित्र धाम में नाले एवं तालाब पर अवैध कब्जे का खुला खेल!

नगर निगम प्रशासन की लापरवाही..

भू-माफियाओं की मनमानी..

Ravi Maurya अयोध्या नगर निगम के अशोक सिंघल नगर वार्ड में नयाघाट से लवकुश नगर मुजहनिया तक जाने वाले ऐतिहासिक सोती नाले पर भू-माफियाओं का तांडव जारी है। कभी प्रशासन की निगरानी में बुलडोजर चला, तो कभी सिर्फ कागज़ी चेतावनियाँ दी गईं। 

नतीजा—नाला फिर से पाटा जा रहा है, दुकानें फिर से बनाई जा रही हैं, और जमीनें खुलेआम बेची जा रही हैं।विकास प्राधिकरण और सिंचाई विभाग की जांच रिपोर्ट खुद कहती है कि निर्माण अवैध है, नाले के ऊपर है, और पूर्व में ध्वस्तीकरण की कार्यवाही हो चुकी है। नगर निगम ने चेतावनी दी, टीम बनी, लेकिन कार्यवाही का दम नदारद।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतिदिन अवैध कब्जों को हटाने के सख्त आदेश दे रहे हैं, मगर अयोध्या में उल्टा हो रहा है कब्जा हट नहीं रहा, बढ़ता जा रहा है।

हनुमानगुफा से विवेक सृष्टि तक मिट्टी डालकर नाले को बंद किया जा रहा है। यही नाला जलवानपुरा, कौशलेश कुंज और परिक्रमा मार्ग से होते हुए अयोध्या के पानी को निकालने का मुख्य माध्यम है। यदि यही पाट दिया गया, तो आने वाले बरसात में पूरा वार्ड वासुदेवघाट, लवकुश नगर और जलवानपुरा जलमग्न हो जाएगा।वार्ड की निवर्तमान पार्षद लक्ष्मी सिंह, शिकायतकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने नगर आयुक्त व जिलाधिकारी से मांग की है कि सोती नाले को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई हो।सहायक नगर आयुक्त अयोध्या जोन अशोक कुमार गुप्ता से इस मामले पर जानकारी लेने के लिए फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। 

मीडिया की टीम जब स्वयं मौके पर पहुंची, तो क्षेत्र की जीरो ग्राउंड रिपोर्टिंग की गई। स्थानीय लोगों से पूछताछ कर जब नाले की हालत देखी गई, तो स्पष्ट हुआ कि संकट कितना बड़ा है। यदि नाले और तालाब नहीं बचे, तो आसपास की कॉलोनियों और गलियों का गंदा पानी जाएगा कहां? और सबसे गंभीर बात यह है कि आज भी नाले पर तेजी से मकान बन रहे हैं। 

निर्माण कार्य खुलेआम जारी है। कई स्थानों पर छतें डाली जा रही हैं और दीवारें उठाई जा रही हैं। इन अवैध निर्माण की फोटो, वीडियोग्राफी और भू-माफियाओं की करतूतों से जुड़े सभी दस्तावेज़ मीडिया के पास मौजूद हैंजिनमें विकास प्राधिकरण, सिंचाई विभाग और नगर निगम की चेतावनियों और आदेशों की प्रतियां भी शामिल हैं।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह रिपोर्ट प्रशासन को जगाएगी, या फिर इस बार की बरसात में जलभराव के साथ-साथ शासन की व्यवस्था भी डूबती नज़र आएगी।

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