Skip to main content

जिले के हर गांवों चौराहे पर अवैध शराब की बिक्री

स्थानीय पुलिस व आबकारी विभाग की मिलीभगत

पारसनाथ प्रजापति, संवाददाता

सिंगरौली। जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री चरम पर है जो जिले के शराब माफिया हैं सिर्फ उनके पास दुकान में शराब बेंचने की परमिशन मिली हुई है लेकिन जो शराब के ठेकेदार हैं अपने संबंधित क्षेत्र में ठेकेदारों का कनेक्शन गांव व शहरों तक जुड़ा हुआ है जो शराब ठेकेदारों के गुर्गे हैं चार पहियां व दो पहियां वाहनों से शराब की पयकारी कर उन छोटे-छोटे किराना व्यापारियों को पहुंचा रहे हैं जहां अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से बिना रोक-टोक होती चली आ रही है

जिले के पुलिस कप्तान तो बदल जाते हैं थाना के प्रभारी बदल जाते हैं लेकिन पुलिस विभाग व आबकारी विभाग में जो अवैध कारोबार का परंपरा चली आ रही है गांवों व शहरों में अवैध शराब परोसी जा रही है इन अवैध कारोबारियों पर अंकुश लगाने में पुलिस प्रशासन व आबकारी विभाग असफल रहा है ऐसा नहीं है कि जिले की पुलिस जिले की आबकारी विभाग को अवैध शराब कारोबार की जानकारी नहीं है इन विभागों को बखूबी जानकारी है इन विभागों के जिम्मेदार जानबूझकर अनजान बने रहते हैं और अनजान बनने का कारण सिर्फ यह है इनको महीने की चढ़ोतरी हर महीने समय पर शराब ठेकेदार द्वारा प्राप्त हो जाती है।

निर्धारित दर से अधिक रेट में बेची जा रही शराब की बोतले 

जिले में जो देसी विदेशी शराब की दुकानें संचालित है उन दुकानों पर रेट सूची उपलब्ध नहीं है नाहीं ग्राहकों को बिल दी जाती है जो जिले के आबकारी अधिकारी हैं उनका काम है दुकान पर रेट सूची उपलब्ध करवाना और यदि कोई शराब दुकान का संचालक प्रिंट रेट से अधिक में शराब की बिक्री करें तो उन पर जिला आबकारी अधिकारी को बाकायदा कार्यवाही करनी चाहिए लेकिन साहब ऐसा नहीं करेंगे और ऐसा इसलिए नहीं करेंगे की साहब का भी नजराना फिक्स है

शराब दुकान का जो संचालक होता है जो शराब बिक्री में अवैध वसूली करता है वह अकेले उस राशि को नहीं हड़पता उसमें स्थानीय पुलिस व जिले के आबकारी विभाग का भी हिस्सा होता है।

शराब पीने वालों की आर्थिक स्थिति खराब,ऊपर से अवैध वसूली 

आपको बता दें शराब पीने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति वैसे भी खराब होती है शराब की लत लग जाने से उनके घर परिवार पर बुरा प्रभाव पड़ता है इनका परिवार हमेशा पिछड़ता जाता है और उनके घरों में जो मासूम बच्चे होते हैं उनके शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ते हैं और शराब माफिया दुकान के संचालक इन ग्राहकों से अवैध वसूली कर गाढ़ी कमाई करने में जुट गए हैं

अब देखना यह होगा क्या जिले का पुलिस प्रशासन व आबकारी महकमा गांवों,शहरों किराना व फुटपाथीं दुकानों में संचालित अवैध कुचिया सेंटर एवं शराब बिक्री अवैध वसूली पर लगाम लगा पायेगा या फिर इसी तरह शराब कारोबारियों के गुर्गों पर विभाग की मेहरबानी बनी रहेगी राष्ट्र की बात समाचार आप सभी पाठकों से आग्रह करता है शराब पीने से बचे औरों को भी बचाएं।

Comments

Popular posts from this blog

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

“अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी: उजड़ने की कगार पर संजय कॉलोनी भाटी माइंस”

जितेंद्र कुशवाहा दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित संजय कॉलोनी भाटी माइंस के लोग आज भी अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही कॉलोनी है, जिसे वर्ष 1976 में दिल्ली सरकार ने विधिवत बसाया था और यहां के निवासियों को पट्टे भी दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें एक स्थायी ठिकाना मिल गया है। लोग गांव से आए, मजदूरी की, और जीवनभर की कमाई लगाकर ईंट-पत्थर से अपने आशियाने खड़े किए। लेकिन 1991 में अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी ने यहां के निवासियों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया। अधिकारियों की एक गलत रिपोर्ट और अदूरदर्शी निर्णय के कारण पूरी कॉलोनी को रिज क्षेत्र (संरक्षित वन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि 15 साल पहले जिन घरों को कानूनी मान्यता दी गई थी, वे अचानक “अवैध” हो गए। आज हालात यह हैं कि सरकार और प्रशासन उन्हीं घरों को तोड़ने पर आमादा है, जिन पर लोगों ने अपना खून-पसीना बहाकर जीवन की पूंजी लगा दी थी। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए नव युवक ग्राम विकास समिति के सदस्य एवं ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ के संस्थापक समाज...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...