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आज़ाद सोच ने जन्म लिया!

 सत्येन्द्र जाखड़ “अनाड़ी”

चंद्रशेखर आज़ाद

उम्र नदानी बचपन की पर बीती बम ओर गोलो में

देशभक्ति की ज्वालाओं ने शोले भर दिए बोलो में

भाबरा गांव की शान बढ़ाने सन 1906 में जन्म हुवा

भीलों के संग प्लेबढ़े ओर तीरंदाजी शोक हुवा

जलियावाला बाग ने बदल दिया जीवन का हर मनसूबा

आज़ादी की मन में ठानी आज़ाद सोच ने जन्म लिया

1921 आंदोलन अब अपने सिर जोरों पर था

देशभक्ति से ओतप्रोत वे आंदोलन के सिर मोर हुए

चंद्रशेखर से पंडितजी फिर किक सिल्वर से आज़ाद हुए

बनारस बन गया कर्मस्थल लिखा क्रन्तिकारी जीवन का अध्याय नया

अंग्रेजी सत्ता में गढ़ गए त्रिशूल बन के शिव शंकर का

काकोरी कांड कर डाला अंग्रेजो की नाक तले से

कुछ साथी तो शहीद हुए पर फिर दल बनकर खड़े हुए

भगतसिंह के सांडर्स वध में उनके भी पग साथ हुए

फिर तो जैसे एक कलम से कई सिग्नेचर साथ हुए

असेम्बली बम की योजना फिर से नई तारीख बनी 

अंग्रेजो के भीतर में फिर गोलों की आवाज हुई

कई दफा संघर्षों में अंग्रेजों की मात हुई

700 मुखबिर अंग्रेजों के एक शेखर ना ढूंढ सके

अपनों की गद्दारी कारण अल्फ़्रेड पार्क घिरे मिले

फिर भी हिम्मत हुई नही कोन शेर मांद में हाथ धरे

एक प्रण के बलबूते आज़ाद रहे आज़ाद गए

देशभक्त वो क्रांतिवीर बस रहे आग के शोलों में

उम्र नदानी बचपन की पर बीती बम ओर गोलो में

देशभक्ति की ज्वालाओं ने शोले भर दिए बोलो में

शोले भर दिए बोलों में..

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