- लखनऊ नगर निगम की कार्यशाला में फोरमैन की कमी से कूड़ा गाड़ियां बन रही कबाड़..
- नगर निगम को भारी नुकसान..
शिवांश पाण्डेय
लखनऊ नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला आर-आर विभाग में पिछले कई वर्षों से फोरमैन की नियुक्ति नहीं हुई है, जिसके चलते कई कूड़ा गाड़ियां समय पर मरम्मत न होने के कारण कबाड़ बन रही हैं। इससे नगर निगम को हर साल लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
वर्तमान में जेई (JE) और फाइटर मैकेनिकल एवं हाइड्रोलिक गाड़ियों की देखरेख में लगे हुए हैं, लेकिन वे भी पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं। ड्राइवरों को जब गाड़ियां खराब होती हैं तो रिपोर्ट लगाने के लिए उन्हें विभाग दर विभाग भटकना पड़ता है।
पहले जब कार्यशाला में फोरमैन हुआ करते थे, तब गाड़ियों की समय से मरम्मत होती थी और ड्राइवरों को शिकायत दर्ज कराने में कोई दिक्कत नहीं होती थी।
वहीं दूसरी ओर, ईमानदार नगर आयुक्त द्वारा हाल ही में नगर निगम में फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के उद्देश्य से अधिकारियों को लग्जरी गाड़ियों का उपयोग न करने का निर्देश दिया गया, जिससे राजस्व की बचत हो सके। लेकिन हैरानी की बात है कि नगर निगम एक जरूरी पद "फोरमैन" की नियुक्ति को नजर-अंदाज कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ जेई की भर्ती कर निगम के राजस्व पर अनावश्यक भार डाला जा रहा है। जनता और कर्मचारियों में अब यह सवाल गूंजने लगा है —आखिर किस अधिकारी पर भरोसा किया जाए?
अब सवाल यह उठता है कि जब एक फोरमैन की नियुक्ति नगर निगम को करोड़ों के नुकसान से बचा सकती है, तो आखिर इसकी अनदेखी क्यों की जा रही है? और जब पारदर्शिता और बचत की बात हो रही है, तो क्या यह दोहरी नीति नहीं है?
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