मैं एक ऐसे इंसान की कहानी सुना रहा हूँ, जिसके शरीर पर दुनिया के सबसे पुराने टैटू मिले. कहानी है ओत्ज़ी की, जिसे आइसमैन भी कहते हैं.
..वो कोई आम इंसान नहीं था. वो 5,300 साल पहले बर्फ में दबा और फिर दबा रहा ताकि एक दिन हमें अपनी कहानी सुना सके.
सितंबर 1991 की बात है. इटली और ऑस्ट्रिया की सीमा पर, ओत्ज़टाल आल्प्स की बर्फीली चोटियों पर दो जर्मन पर्यटक- हेल्मुट और एरिका सिमोन घूम रहे थे। ऊँचाई थी 3,210 मीटर और चारों तरफ थी बस बर्फ ही बर्फ. तभी उनकी नज़र एक अजीब सी चीज़ पर पड़ी. पहले तो उन्हें लगा कि शायद कोई हाल ही में मरा हुआ पर्वतारोही होगा लेकिन जब पास गए तो चौंक गए. ये कोई साधारण लाश नहीं थी. ये था एक ममीकृत शरीर जो बर्फ में पूरी तरह सुरक्षित था. वैज्ञानिकों ने बाद में जब इसकी विस्तार से जाँच की तो पता चला कि ये शरीर 3350 से 3105 ईसा पूर्व का है, यानि करीब 5,300 साल पुराना. इस इंसान को ओत्ज़ी नाम दिया गया क्योंकि वो ओत्ज़टाल आल्प्स में मिला था.
ओत्ज़ी एक पुरुष था जिसकी उम्र मरते वक्त करीब 45 साल रही होगी. वो लगभग 1.6 मीटर लंबा था और उसका वजन करीब 50 किलो था. वैज्ञानिकों ने उसकी जिंदगी और मौत की कहानी को बारीकी से समझने की कोशिश की और जो सामने आया, वो किसी जासूसी फिल्म से कम नहीं था.
ओत्ज़ी की सबसे खास बात थी उसके शरीर पर मिले 61 टैटू. ये दुनिया के सबसे पुराने टैटू माने जाते हैं. पहले तो वैज्ञानिकों को लगा कि शायद ये निशान या घाव हैं लेकिन 2015 में जब मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग (खास तरह की फोटोग्राफी) से उसके शरीर की जाँच की गई, तो पक्का हुआ कि ये टैटू हैं. ये टैटू कोई सजावटी चित्र या जानवरों की आकृतियाँ नहीं थे बल्कि साधारण सी काली रेखाएँ और कुछ क्रॉस के निशान थे. सबसे ज्यादा टैटू उसकी टाँगों, पीठ, और कमर पर थे. कुछ टैटू उसके घुटने, टखने, और कलाई पर भी थे. टैटुओं को बनाने के लिए सूत या राख का इस्तेमाल किया गया था.
वैज्ञानिकों का मानना है कि पहले छोटे-छोटे कट बनाए गए होंगे और फिर उसमें सूत को रगड़ा गया होगा. ये टैटू इतने गहरे और साफ थे कि लगता था कि इन्हें बार-बार बनाया गया हो… लेकिन सवाल ये है- ये टैटू बनाए क्यों गए? वैज्ञानिकों ने जब ओत्ज़ी के टैटू वाले हिस्सों की जाँच की तो पाया कि ये वही जगहें थीं जहाँ उसके शरीर में दर्द या बीमारी थी. मसलन, उसके टैटू कमर, घुटनों, और टखनों पर थे और एक्स-रे से पता चला कि इन जगहों पर उसे आर्थराइटिस (जोड़ों का दर्द) और हड्डियों में खराबी थी. इससे एक थ्योरी बनी कि शायद ये टैटू इलाज के लिए बनाए गए थे. उस समय के लोग मानते होंगे कि टैटू बनाने से दर्द कम होता है या बीमारी ठीक हो जाती है. ये एक तरह का प्राचीन एक्यूपंक्चर जैसा हो सकता है.
हालाँकि कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि इन टैटुओं का सामाजिक या धार्मिक महत्व भी हो सकता है. शायद ये किसी खास समूह की पहचान, बहादुरी, या रस्म का हिस्सा रहे हों, लेकिन चूँकि उस समय लिखित भाषा नहीं थी, हम सिर्फ अंदाज़ा ही लगा सकते हैं।
ओत्ज़ी की जिंदगी को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने उसके सामान, कपड़ों, और शरीर की हर छोटी चीज़ की जाँच की. वो कॉपर एज यानि ताम्र युग का इंसान था और उसके पास उस समय की सबसे उन्नत चीज़ें थीं। उसके पास से मिले-
- एक तांबे की कुल्हाड़ी, जो उस समय बहुत कीमती थी. ये बताता है कि शायद वो अपने समूह में कोई खास इंसान था।
- एक पत्थर का चाकू, धनुष, और कई तीर जिनमें से कुछ अधूरे थे, जैसे वो उन्हें बना रहा हो।
- ऐसे कपड़े जो भालू, बकरी, और हिरण की खाल से बने थे। उसने जूते भी पहने थे जो भालू की खाल और पेड़ की छाल से बने थे और बर्फ में चलने के लिए खास डिज़ाइन किए गए थे.
- एक घास की चटाई और बैकपैक जो बताता है कि वो लंबी यात्राएँ करता था.
उसके पेट की जाँच से पता चला कि मरने से पहले उसने हिरण का मांस, कुछ अनाज, और जंगली जामुन खाए थे लेकिन उसकी सेहत अच्छी नहीं थी. उसे लैक्टोज़ इनटॉलरेंस था, यानी वो दूध नहीं पचा सकता था. उसके दाँत खराब थे और फेफड़े आग के धुएँ से काले पड़ गए थे, शायद इसलिए कि वो हमेशा आग के पास बैठता था.
ओत्ज़ी की मौत की कहानी सबसे रोमांचक है. पहले वैज्ञानिकों को लगा कि वो ठंड या थकावट से मरा होगा लेकिन 2001 में जब उसके शरीर का एक्स-रे किया गया तो एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ. उसके कंधे में एक तीर का नुकीला सिरा धँसा हुआ था जो उसकी धमनी को चीर गया. इसके अलावा उसके सिर पर चोट के निशान थे और हाथ पर एक गहरा घाव था जो शायद किसी लड़ाई में लगा.
वैज्ञानिकों का मानना है कि ओत्ज़ी की हत्या की गई थी. शायद वो किसी हमले का शिकार हुआ, या फिर किसी दुश्मन ने उसे मार डाला. उसके हाथ के घाव से पता चला कि लड़ाई मरने से कुछ दिन पहले शुरू हो चुकी थी. वो शायद भाग रहा था और बर्फीली चोटी पर छिपने की कोशिश कर रहा था लेकिन हमलावरों ने उसे ढूंढ लिया.
आज ओत्ज़ी इटली के साउथ टायरॉल म्यूज़ियम ऑफ आर्कियोलॉजी में है जहाँ उसे खास तापमान (-6 डिग्री सेल्सियस) में रखा गया है ताकि उसका शरीर सुरक्षित रहे. लोग उसे देखने दुनिया भर से आते हैं. वो सिर्फ एक ममी नहीं बल्कि एक टाइम मशीन है जो हमें ताम्र युग के जीवन की झलक दिखाती है.
ओत्ज़ी की कहानी हमें बताती है कि 5,300 साल पहले के लोग भी हमारी तरह जटिल थे. वे बीमारियों से लड़ते थे, औज़ार बनाते थे, और शायद टैटू बनाकर अपने दर्द को कम करने की कोशिश करते थे.
उसके टैटू हमें उस समय की चिकित्सा, विश्वास, और संस्कृति की एक झलक देते हैं.. जबकि उसकी हत्या की कहानी हमें बताती है कि इंसान उस समय भी प्यार, लड़ाई, और संघर्ष का हिस्सा था.
2017 में Iceman नाम की फिल्म आई थी जो ओत्ज़ी पर बनाई गई.
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