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शिव नारायण सिंह की प्रेरणादायक बोध कथाएं विद्यार्थियों के जीवन में बदलाव ला रही

शिव नारायण सिंह अनूठा किस्सागो

देवरिया के शिव नारायण सिंह की प्रेरणादायक बोध कथाएं न केवल विद्यार्थियों के जीवन में बदलाव ला रही हैं बल्कि अब इन पर देशभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शोध भी हो रहा है। 
जानिए कैसे उनकी अनूठी शिक्षा पद्धति आधुनिक दौर में विद्यार्थियों को एक संतुलित और मूल्यपरक शिक्षा प्रदान कर रही है...

देवरिया की मेधा का देशभर में डंका

गुरुकुल परंपरा की याद दिलाती बोध कथाएं
प्रेस्टिज इंटर कालेज के संस्थापक प्रधानाचार्य शिव नारायण सिंह की अनूठी पहल है।

शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें नैतिक मूल्य और जीवन दर्शन भी समाहित हो—इस उद्देश्य को लेकर प्रेस्टिज इंटर कालेज, देवरिया के संस्थापक प्रधानाचार्य शिव नारायण सिंह बीते 25 वर्षों से लगातार प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को प्रेरणादायक बोध कथाएं सुनाते आ रहे हैं।
उनकी यह अनूठी पहल न केवल विद्यार्थियों में संस्कार और नैतिकता की भावना विकसित कर रही है, बल्कि अब इन बोध कथाओं पर देशभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शोध भी किया जा रहा है।
मूल रूप से देवरिया के भटनी कस्बा से सटे छपिया जयदेव गांव के रहने वाले सामान्य दिखने वाले शिवनारायण सिंह गणित से स्नातकोत्तर हैं। जन्म-शिक्षा-दीक्षा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुई। इसकी वजह उनके पिता सरकारी सेवा में थे। बिलासपुर से एमएससी गणित की पढ़ाई पूरा करने के बाद देवरिया आए।

शुरुआती दौर में उन्होंने बच्चों को ट्यूशन व कोचिंग पढ़ाया। उसके बाद शिक्षण संस्थान खोलने का मन बनाया। प्रेस्टीज इंटर कालेज के नाम से विद्यालय खोला। विद्यालय में अनुशासन एवं संस्कार युक्त शिक्षा प्राथमिकता में है।

कई विश्वविद्यालयों में हो रहा शोध

शिव नारायण की बोध कथाएं न केवल विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में सहायक हैं, बल्कि अब यह अकादमिक शोध का विषय भी बन चुकी हैं।

छत्तीसगढ़ के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर), अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (रीवा), केंद्रीय विश्वविद्यालय (बठिंडा, पंजाब) और पंजाबी विश्वविद्यालय (पटियाला) जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के साथ-साथ अन्य विवि में शोधार्थी उनकी कथाओं के प्रभाव और महत्व पर हिंदी के साथ-साथ शिक्षा शास्त्र, मनोविज्ञान, दर्शन शास्त्र, समाज शास्त्र, पर्यावरण विज्ञान आदि विषयों में अपने अनुसंधान का विषय बनाया है।
यह शोध भारतीय गुरुकुल परंपरा में नैतिक शिक्षा की प्रासंगिकता को दर्शाने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा प्रणाली में इसकी भूमिका पर भी केंद्रित हैं। 
शिव नारायण सिंह की बोध कथाओं पर शोध की शुरुआत 2010 में पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला में प्रोफेसर राम निवास शर्मा के निर्देशन में मीनाक्षी गर्ग से हुई। 

बोध कथाओं से बच्चों को मिल रही नई दिशा

शिव नारायण सिंह गणित विषय में एमएससी हैं। वे आधुनिक विज्ञान और भारतीय परंपरा के समन्वय में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित न रहकर नैतिकता, मूल्यों और जीवन दर्शन को भी आत्मसात करे। 
इसी उद्देश्य से वे हर दिन प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को एक प्रेरणादायक बोध कथा सुनाते हैं। बीते वर्षों में इंडिया टुडे (अनूठा किस्सागो, मई 2008), नेशनल हेराल्ड (सितम्बर 2010), वोमेन्स ईरा (जुलाई 2011) सहित अनेक प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में शिव नारायण सिंह की सरलता, सहजता व कार्यों की प्रसिद्धि के बारे में लेख छप चुके हैं।

नैतिकता व संस्कारों का संचार कराती बोध कथाएं
उनकी बोध कथाएं न केवल विद्यार्थियों को नैतिकता की ओर प्रेरित करती हैं, बल्कि उनके जीवन को दिशा देने का कार्य भी करती हैं। कई पूर्व छात्र मानते हैं कि इन कथाओं ने उनके जीवन में गहरा प्रभाव डाला और वे आज भी इनसे प्रेरणा लेते हैं।
भारतीय गुरुकुल परंपरा का आधुनिक रूप
शिवनारायण की यह अनूठी पहल भारतीय गुरुकुल परंपरा की याद दिलाती है, जहां शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न होकर नैतिकता और संस्कारों का भी संचार करती है। उनकी यह शिक्षा पद्धति आधुनिक दौर में विद्यार्थियों को एक संतुलित और मूल्यपरक शिक्षा देने का कार्य कर रही है।
इस पहल को लेकर शिक्षाविद डा.अरुणेश नीरन का कहना है कि अगर स्कूलों में इस तरह की नैतिक शिक्षा अनिवार्य कर दी जाए, तो समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना हो सकती है।

प्राख्यात विधिवेत्ता वीरेन्द्र कुशवाहा का कहना है कि प्रेस्टिज इंटर कालेज के संस्थापक प्रधानाचार्य शिव नारायण सिंह अपने विद्यालय में शिक्षा, नैतिकता और संस्कार को सर्वोपरि रखकर कार्य करते हैं और वह समयनिष्ठ (Punctual) व्यक्ति हैं। उनकी बोध कथाओं में नैतिक, सांस्कारिक व पारिवारिक मूल्यों की महत्ता सर्वत्र दृष्टिगत होती है। इसलिए उन्होंने अपने विद्यालय का सूत्र वाक्य बनाया है...

               *जो_बनना_है_वह_पढ़ना_है*
               *जो_पढ़ना_है_वह_बनना_है*

यह ऐतिहासिक उपलब्धि शिव नारायण सिंह की अथक मेहनत, दृढ़ संकल्प, समर्पण और साधना का परिणाम है।
उनकी बोध कथाओं पर देश के अनेक विश्वविद्यालयों में शोध होना जनपद देवरिया सहित देश व प्रदेशों के लिए गौरव का विषय है।

देवरिया के इस शिक्षाविद की सोच और प्रयास अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है, जिससे यह साबित होता है कि मेधा और नवाचार केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी नई सोच और नवाचार की असीम संभावनाएं मौजूद हैं।

शिव नारायण सिंह जी की इस विशिष्ट उपलब्धि पर उनकी भूरि भूरि प्रसंशा करते हुए उनको बहुत बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं।

लाख दलदल हो, पाँव जमाए रखिए,
हाथ खाली ही सही, ऊपर उठाए रखिए!

कौन कहता है छलनी में, पानी रुक नही सकता, 
बर्फ बनने तक, हौसला बनाये रखिए! 
वीरेन्द्र सिंह कुशवाहा

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