Skip to main content

महिला को इंसाफ की बजाय जेल भेजने की धमकी?

"तानाशाह सोच के चौकी इंचार्ज" बने गोविंद अग्रवाल: महिला को इंसाफ की बजाय जेल भेजने की धमकी, क्या यही है पुलिस की असलियत?

ज्यादा बोलोगी तो जेल भेज दिया जाएगा!..

अयोध्या के खण्डासा थाना क्षेत्र में चौकी इंचार्ज गोविंद अग्रवाल एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। पहले भी अपने अभद्र व्यवहार और विवादित वीडियो बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुके गोविंद अग्रवाल अब एक नए वायरल वीडियो में फिर चर्चा में हैं।

इस बार उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह एक महिला को स्पष्ट शब्दों में धमकाते हुए सुनाई दे रहे हैं—“ज्यादा बोलोगी तो जेल भेज दिया जाएगा।”

यह भाषा न केवल संविधान और कानून की गरिमा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि एक पुलिस अधिकारी की तानाशाही मानसिकता को भी उजागर करती है। 

जब न्याय मांगने आई महिला को थाने में कानून नहीं, बल्कि धमकी मिलती है, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता पर उठता है।

वीडियो में दरोगा साहब न केवल धमकी दे रहे हैं, बल्कि यह तक कहते हैं कि “जो हुआ, सही हुआ।” क्या अब पुलिस का काम निष्पक्ष जांच करना नहीं, बल्कि अपराध को जायज़ ठहराना बन गया है? क्या जनता को थानों में डराने और दबाने का काम सौंपा गया है?

चौकी इंचार्ज गोविंद अग्रवाल इससे पहले भी विवादित बयानबाजी और दुर्व्यवहार के कारण स्थानीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं। पहले जो छवि उनकी “झगड़ालू और अमर्यादित भाषा” के लिए बनी थी, अब वह “धमकीबाज़ चौकी इंचार्ज” के रूप में और गंभीर होती जा रही है। 

सवाल उठता है कि जब किसी पुलिस अधिकारी के नाम इतने गंभीर आरोप और वीडियो सामने आ चुके हैं, तब भी वह ड्यूटी पर कैसे बना रह सकता है? क्या प्रशासन इस व्यवहार को मौन स्वीकृति दे रहा है?

क्या यही है वह खाकी वर्दी जिसकी शपथ एक सिपाही संविधान के समक्ष लेता है? क्या अब पुलिस अफसर खुद ही जज और जल्लाद की भूमिका निभाने लगे हैं? 

जनता यह पूछ रही है कि अगर इंसाफ मांगने पर जेल भेजने की धमकी मिले, तो क्या थानों को इंसाफ का मंदिर कहा जा सकता है?

अब समय है कि ऐसी सोच और मानसिकता को सिर्फ विभागीय ट्रांसफर से नहीं, बल्कि न्यायिक जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई से जवाबदेह बनाया जाए। 

जब तक ऐसे अफसरों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक पुलिस सुधार सिर्फ फाइलों और भाषणों तक सीमित रह जाएगा।

खण्डासा की जनता, अयोध्या की चेतना और उत्तर प्रदेश की संवेदनशील आत्मा यह सवाल उठा रही है कि क्या सत्ता और खाकी के गठजोड़ के बीच आम नागरिक की आवाज यूं ही दबती रहेगी? 

अगर नहीं, तो अब वक्त है कि शासन-प्रशासन यह सिद्ध करे कि कानून सभी के लिए एक समान है —चाहे वो आम जनता हो या वर्दी में बैठा अधिकारी।

Comments

Popular posts from this blog

दलित सफाई कर्मचारी संगठनों को नहीं मिला निमंत्रण, सरकार पर भेदभाव का आरोप

आठवें वेतन आयोग की बैठक में सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा पर भड़का आक्रोश सफाई कर्मचारियों की समस्याएं वेतन आयोग तक पहुंचने से रोकने का आरोप, नेताओं ने जताई नाराजगी मनोज कुमार मौर्य   आगरा। एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सफाई कर्मचारियों के पाॅव धोकर उनके कार्य और परिश्रम को नमन करते हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार की नौकर शाही उत्तर प्रदेश के सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा करके उन्हें हतोत्साहित कर रही है। यह स्थिति असहनीय है। यह बात उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद इलाहाबादी एवं उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुन्दर बाबू चंचल ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के विशेष सचिव पुष्प राज ने उत्तर प्रदेश शासन वित्त ( वेतन आयोग) अनुभाग-2 संख्या- वे आ०-2-387/ दस- 2026 लखनऊ: 08 जून 2026 के द्वारा शासनादेश जारी करते हुए दिनांक 22-23 जून 2026 को लखनऊ में आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के सदस्य की होने बाली बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के अलग अलग विभागों के 24 कर्म...

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...