Skip to main content

पेंशनर्स कल्याण विरोधी नीतियों के खिलाफ धरना एवं ज्ञापन


अन्याय, शोषण के खिलाफ पेंशनर्स एसोसिएशन जागी है!

रायबरेली/लखनऊ

भारत सरकार के पेंशनर्स कल्याण विरोधी फाइनेंसियल अमेन्दमेंट नियम संबंधी बिल 28 मार्च 2025 के उपलक्ष में एआईआरबीएसएनएलईडबलूए रायबरेली जिला शाखा द्वारा एक धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में बीएसएनएल / दूरसंचार के पेंशनर्स एसोसिएशन एवं श्रम संघो के मुख्य संगठन एवं सभी अनुशाषिक संगठन प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तरीय संगठन भारत सरकार की पेंशनर्स कल्याण विरोधी नीतियों के खिलाफ एक जुट होकर आवाज बुलंद कर रहे हैं।

कार्यक्रम का आयोजन उप महा प्रबंधक कार्यालय, भारत संचार निगम लिमिटेड, ऑपरेशनल एरिया, रायबरेली में किया गया है।

इस अवसर पर शिवनाथ सिंह, सीनियर सर्कल वाइस प्रेसिडेंट, पीएचक्यू उत्तर प्रदेश और डीएस एआईआर बीएसएनएलईडब्ल्यूए रायबरेली ने कहा, "सच कहना अगर बगावत है तो समझो हम भी बागी हैं। अन्याय, शोषण के खिलाफ पेंशनर्स एसोसिएशन जागी है।"

संस्था के जिला अध्यक्ष के पी बाजपेई ने कहा कि सरकार सी सी एस रिवाइज्ड पेंशन रूल  37 मे संशोधन करके पेशनर्स को केंद्रीय वेतन  आयोगों क़ी परिधि से बाहर कर कार्मिकों के पेंशन रिवीज़न को हमेशा के लिए बंद करना चाहती है। 

टेलीकॉम पेंशनर्स संगठन के महासचिव एस एन सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस बारे मे निर्णय दे चुकी है कि कार्मिकों को मिलने वाली पेंशन नियोक्ता द्वारा दी जाने वाली कोई अनुग्रह राशि नहीं है बल्कि यह पेंशनधारी द्वारा सेवा काल उसके द्वारा किये गए महनीय सेवा कार्य  का उचित प्रतिफल है जिसे किसी भी नियम से देय पेंशन और समय समय  पर सी पी सी की सिफारिस के अनुसार पेंशन और भत्तों का पुनरीक्षण रोका नहीं जा सकता। सभी ने सरकार इस कदम की आलोचना की और 28 मार्च 2025 के फाइनेंसियल अमेण्डमेंट बिल को तुरन्त वापस लेने की मांग की। भारत संचार निगम लिमिटेड, उप महाप्रबंधक, ऑपरेशनल एरिया, रायबरेली के इस धरना, प्रदर्शन के दौरान लाल बहादुर यादव, राम सनेही यादव, आर वी त्रिपाठी, बी के त्रिवेदी, राम मनोहर लाल, शारदा प्रसाद ओझा, कृष्णा गिरि, राम सजीवन शर्मा, हरि श्याम, अशोक कुमार, मोनी, ए के पाल, जगदीश आदि मौजूद रहे।

Comments

Popular posts from this blog

दलित सफाई कर्मचारी संगठनों को नहीं मिला निमंत्रण, सरकार पर भेदभाव का आरोप

आठवें वेतन आयोग की बैठक में सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा पर भड़का आक्रोश सफाई कर्मचारियों की समस्याएं वेतन आयोग तक पहुंचने से रोकने का आरोप, नेताओं ने जताई नाराजगी मनोज कुमार मौर्य   आगरा। एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सफाई कर्मचारियों के पाॅव धोकर उनके कार्य और परिश्रम को नमन करते हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार की नौकर शाही उत्तर प्रदेश के सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा करके उन्हें हतोत्साहित कर रही है। यह स्थिति असहनीय है। यह बात उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद इलाहाबादी एवं उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुन्दर बाबू चंचल ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के विशेष सचिव पुष्प राज ने उत्तर प्रदेश शासन वित्त ( वेतन आयोग) अनुभाग-2 संख्या- वे आ०-2-387/ दस- 2026 लखनऊ: 08 जून 2026 के द्वारा शासनादेश जारी करते हुए दिनांक 22-23 जून 2026 को लखनऊ में आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के सदस्य की होने बाली बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के अलग अलग विभागों के 24 कर्म...

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...