उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में रहने वाले किसान शिव कुमार मौर्य 4 एकड़ में 100 से ज्यादा औषधीय फसलों की खेती करते हैं।
उनका गांव के काफी करीब है। शिवकुमार मौर्या ऐसी खेती करते हैं, जिसकी मार्केट में डिमांड थोड़ी ज्यादा होती है।
वो मोनो क्रॉपिंग की जगह बहुफसली खेती करते हैं, जिससे किसी न किसी फसल से न सिर्फ रोज पैसा आता है बल्कि एक में कुछ घाटा होता नजर आया तो दूसरे से भरपाई हो जाती है। वो अपनी बहुत सारी फसलों की खुद ही मार्केटिंग करते हैं।
शिवकुमार की बगिया की स्थापना उनके पिता ने की थी जो एक वैद्य थे। शिवकुमार का परिवार आज भी कई देशी दवाएं लोगों को देता है।
वो अपने घर पर एलोवेरा समेत कई तरह के जेल से साबुन बनाते हैं। मोरिंगा (सहजन) का पाउडर बनाकर बेचते हैं। गन्ने का सिरका, जामुन का सिरका और लेमन ग्रास के कई उत्पाद बनाते हैं।
शिवकुमार मौर्या- बेड बनाकर उस पर सब्जियों की खेती करते हैं, ब्राउंडी पर परवल जैसी लता वाली सब्जी लगाते हैं। अगर करेला ऊपर मचान पर चढ़ाते हैं तो उसके नीचे खीरा या दूसरी सब्जी भी लेते हैं।
उनके पास कुंदरू का सैकड़ों साल पुराना पेड़, जिससे एक ही पौधे से कई कुंटल फल मिलते हैं। शिवकुमार मौर्या की बगिया ऐसी है कि उसे देखने सैकड़ों लोग हर महीने आते हैं। इन आने वालों में सरकारी अधिकारी से लेकर स्कूली बच्चे और आम लोग शामिल हैं।



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