आखिर क्यू और किन कारणों के चलते जनता के रखवाले खाकी वर्दी वाले अपनी जिदगी से मुंह मोड़ रहे हैं?
जनता की रखवाली करने वाली पुलिस भी किसी3 दर्द से गुज़रती हैं शायद हम में से यह किसी को नजर नही आता या यह भी बोल सकते हैं की हम देखना ही नही चाहते। अपनों को रोता छोड़ जनता की सुरक्षा में नजर आती यह ख़ाकी, दिन हो या रात, धूप हो या बरसात, सेवा में खड़ी नज़र आती यह ख़ाकी, सब के दुख दर्द में खड़ी नजर आती यह ख़ाकी।
जनता जनार्दन की सुरक्षा के लिए अपनों के हर वादे तोड़ के आती हैं यह खाकी, आपके लिए अपनों को रोता छोड़ कर आती हैं यह ख़ाकी, दिन हो या रात, धूप हो या बरसात आपकी सेवा के लिए यही खड़ी नज़र आती यह ख़ाकी, सब के दुख दर्द में खड़ी नजर आती यह ख़ाकी। हमारे देश की सुरक्षा में जितनी भूमिका भारतीय सेना की है, उतनी ही पुलिस की भी है!
पुलिस वाले हमारे लिए रात भर चैन से सोने के लिए अपनी नींद की कुर्बानी देते हैं इनकी जितनी तारीफ करें उतनी कम है लेकिन यही पुलिस किस दर्द से गुज़रती हैं यह किसी को नजर नही आता हैं बल्कि सच तो यह हैं कि हम देखना ही नही चाहते!
कुछ वर्षों से पुलिसकर्मियों द्वारा आत्महत्या के अनेक मामले सुनने में आ रहें हैं आखिर क्यों और क्या है इसका कारण?
क्या इन पर काम का दबाव अधिक डाला जा रहा है?
क्या इन पर पारिवारिक तनाव बढ़ रहा हैं?
अनुशासित पुलिस बल में आत्महत्या के मामले क्या सिर्फ काम के बोझ की वजह से हो रहे हैं?
बिगड़ा खानपान, अनियमित दिनचर्या से ज्यादातर पुलिस कर्मचारियों को नींद न आने की बीमारी हो रही है या परिवार की टेंशन इसका सीधा असर पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कामकाज पर पड़ रहा है!
पुलिस कर्मचारी चिड़चिड़े तो हो ही रहे हैं साथ ही उनमें डिप्रेशन भी बढ़ रहा है! मनोचिकित्सकों के पास इस तरह के कई मामले सामने आ रहे हैं! कई पुलिसकर्मियों को तो यह पता ही नहीं है कि व डिप्रेशन का शिकार हैं!
डॉक्टरों के अनुसार दस में से छह पुलिसवालों में इस तरह की समस्या है!तनाव मन से संबंधी रोग है जो मन की स्थिति और बाहरी परिस्थिति के बीच असंतुलन के कारण तनाव होता है!
तनाव से व्यक्ति में कई मनोविकार पैदा होते हैं! इससे व्यक्ति हमेशा अशांत, अस्थिर रहता है, तनाव एक द्वंद की तरह है जो व्यक्ति के मन एवं भावनाओं में अस्थिरता पैदा करता है इससे कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है काम के दबाव के कारण व परिवार की परेशानियों से लगभग हर पुलिस कर्मचारी तनाव में रहता है!
दिन-रात ड्यूटी के कारण पुलिस कर्मचारी चिड़चिड़े हो रहे हैं! पुलिस कर्मचारियों को बात-बात पर गुस्सा आता है काम के बोझ के कारण ही उनके शरीर में मेलाटोनिन हार्मोंस असंतुलित हो रहा है।
शरीर के बायोलॉजिकल क्लॉक गड़बड़ा रहे है जब नींद नहीं आती है तो कई पुलिस कर्मचारी नींद की गोलियां तक खाते हैं! लंबे समय तक तनाव में रहने के कारण फिर वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं!
डॉक्टरों का कहना है कि ड्यूटी का समय ज्यादा होने, काम का दबाव, तनाव, नींद न आना, परिवार से दूरी की वजह से अवसाद का शिकार होने के मामले पुलिस कर्मचारियों में देखे जा रहे हैं!
हाल में कई आत्महत्या जैसे लखनऊ पुलिस लाइन में गोली मारकर आत्महत्या, रामपुर कोतवाली टांडा में तैनात सिपाही ने परिसर में आत्महत्या व गाजियाबाद में सिपाही ने आत्महत्या, मुजफ्फरनगर में पुलिस कांस्टेबल ने की आत्महत्या ऐसे ने जाने और कितने पुलिसकर्मियों ने आत्महत्या की।
अब सोचना जरूरी हो रहा हैं की आखिर क्यों यह जनता के रखवाले ही कुंठा के शिकार हो रहे है? अब यह सोचना जरूरी हो गया है की कहीं इसका कारण वर्कलोड, परिवार, हाईप्रेशर या कोई अन्य कारण है! इस मुद्दे पर पुलिस विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को समूह में मिल कर जांच करनी चाहिए की ऐसा क्यों हो रहा हैं?
पुलिस की नौकरी
क्यों तनाव के माहौल में हो रही है ?
इसमें उसकी लंबी ड्यूटी के तो कारण नहीं हैं ?
ड्यूटी के दौरान माहौल नीरस क्यों रहता है?
किसी एक प्वाइंट पर ड्यूटी लगा दी गई और उसको वहीं रहना है?
रूटीन ड्यूटी के अलावा रोज की एक्स्ट्रा ड्यूटी जिसमें वीआईपी मूवमेंट, कानून व्यवस्था, आपदा, ट्रैफिक जाम शामिल है!
फिर से वही सवाल उठता है कि आखिर किन वजहों के चलते खाकी वर्दी के ये रखवाले जिदगी से मुंह मोड़ रहे हैं! बहरहाल पुलिस कर्मियों द्वारा की जा रही आत्महत्याएं कई मायनों में माथे पर सिलवटें बढ़ाने वाली हैं!
यानी चिंता की सबब बनी हुई हैं! इस बाबत माना जा रहा है कि पुलिस वाले लंबी ड्यूटी, तनाव, अधिकारियों का दबाव और कई बार पारिवारिक टेंशन के कारणों के चलते खुद अपने हाथों से मौत को गले लगा रहे हैं!
सरकार को इस और ध्यान देना चाहिए और पुलिसकर्मियों में पैदा हो रही इस कुंठित सोच "आत्महत्या" को खत्म करवाने पर कदम उठाने चाहिए जिससे पुलिस कर्मियों की आत्महत्या पर विराम लग सके।
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