- नगर निगम के लकी SFI
- लखनऊ नगर निगम में ट्रांसफर नीति का बंपर उल्लंघन "कुर्सी जमाओ योजना" पर चल रहा काम!
विशेष रिपोर्ट
लखनऊ – नगर निगम लखनऊ में "ट्रांसफर" शब्द अब शायद डिक्शनरी से ही गायब कर दिया गया है।
कारण? क्योंकि यहाँ एसएफआई (सफाई एवं खाद्य निरीक्षक) कुर्सी से ऐसे चिपके हैं जैसे किसी कुर्सी पर Fevicol लगा हो!
नगर आयुक्त भले ही स्वच्छता सर्वे के बाद अधिकारियों के ट्रांसफर की बात कर रहे हों, लेकिन ज़मीनी सच्चाई ये है कि आठों जोनों में ‘पुरानी पोस्टिंग, नई चाल’ का खेल खूब फल-फूल रहा है।
8 जोन, दर्जनों अधिकारी, एक ही वार्ड –ये कैसा टैलेंट?
कुछ एसएफआई तो इतने "योग्य" निकले कि 2012 से अब तक एक ही वार्ड में टिके हैं। किसी के लिए ये रिकॉर्ड हो सकता है, लेकिन शासन के लिए ये बड़ा सवाल – "ट्रांसफर पॉलिसी गई कहाँ?"
जब सफाई में जीरो, फिर भी पोस्टिंग में हीरो!
कई ज़ोन के एसएफआई तो साफ-सफाई में हर साल फेल होते हैं, लेकिन फिर भी उनकी पोस्टिंग वही की वही। लगता है नगर निगम में ‘सफाई’ से ज़्यादा ‘सिफारिश’ का नंबर चलता है।
ट्रांसफर पॉलिसी या तमाशा?
योगी सरकार की तीन साल वाली ट्रांसफर नीति नगर निगम में मजाक बन गई है। यहाँ तो कई अधिकारी 12 साल की सेवा दे चुके हैं – एक ही कुर्सी, एक ही फाइल, एक ही चायवाला!
कुर्सी प्रेम या कुर्सी का वरदान?
सवाल बड़ा है – क्या इन अधिकारियों के पीछे कोई अदृश्य शक्ति काम कर रही है? या फिर नगर निगम में अब ‘स्थायी वार्ड’ की योजना लागू हो गई है?
अब सवाल वही जो आपके मन मे है
आखिर नगर आयुक्त किन कारणों से बदलाव नही कर पा रहे? आखिर क्यों नहीं हो रहे ट्रांसफर? SFI आखिर इतने "लकी" कैसे हो सकते हैं?
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