- राम पथ या कब्जा पथ?
- फुटपाथों से नजूल ज़मीन तक पसरी..
- अतिक्रमण पासरो योजना..
- विभागों में जिम्मेदारी की टालमटोल लीला..
अयोध्या।
शहर के सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए राम पथ रोड के दोनों ओर के फुटपाथ शाम होते ही अपने उद्देश्य से भटक जाते हैं।
यह नज़ारा केवल तब बदलता है जब मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या कोई बड़ा नेता अयोध्या के दौरे पर होता है। तब नगर निगम और पुलिस प्रशासन पूरी मुस्तैदी से फुटपाथ खाली करवा देता है, लेकिन आम दिनों में यही व्यवस्थाएं आंख मूंद लेती हैं।
नगर निगम के एक अधिकारी से जब इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा, “हमारा कर्तव्य अतिक्रमण हटाना है, लेकिन यह सुनिश्चित करना कि दोबारा अतिक्रमण न हो.
यह अस्थायी पुलिस चौकी की ज़िम्मेदारी है।” यानी जिम्मेदारी ढोने के बजाय विभाग एक-दूसरे पर बोझ डालकर पीछे हट रहे हैं।
राम पथ रोड के सामने कई जगहों पर बड़े-बड़े प्लॉट नजूल विभाग की भूमि के अंतर्गत आते हैं।
ये ज़मीनें वर्षों से खाली पड़ी थीं, लेकिन अब इन पर भी अतिक्रमण तेज़ी से पैर पसार रहा है। चाय-नाश्ते की दुकानें, बांस-बल्लियों के ढांचे, और स्थायी निर्माण की कोशिशें खुलेआम देखी जा सकती हैं।
जब नगर निगम की टीम इन पर कार्रवाई करने पहुंचती है तो कब्जाधारी सीधा कह देते हैं “हम फुटपाथ पर दुकान नहीं लगाया है और यह ज़मीन, आपकी नहीं।”
यह जवाब नगर निगम के हाथ बांध देता है और वह कार्रवाई किए बिना ही लौट जाती है।
यानी एक तरफ सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जा हो रहा है, दूसरी तरफ जिम्मेदार विभाग इसे हटाने से कन्नी काट रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम, नजूल विभाग और पुलिस तीनों ही ज़िम्मेदारी से पलड़ा झाड़ रहे हैं तो इस अतिक्रमण को रोकेगा कौन?
जनता के लिए बने फुटपाथ सिर्फ दिखावा
राम पथ रोड पर सहादतगंज से लेकर लता चौक तक का हाल यही है, जहां जनता के लिए बनाए गए फुटपाथों पर आमजन नहीं, कारोबारियों और कब्जेदारों का राज है। अगर यही चलता रहा तो आने वाले दिनों में 'राम पथ' सिर्फ नाम का रह जाएगा, और यह रास्ता आम जनता की सुविधा नहीं, अराजकता और लापरवाही का प्रतीक बनकर रह जाएगा।

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