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सच मानिये हम गाते रहेंगे!

vinod kumar kushwaha बरेली। बरेली की सुप्रसिद्ध संस्था लेखिका संघ बरेली के तत्वाधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता कवि राजेश गौड़ ने की तथा मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार कमल सक्सेना रहे। 

काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ सभी अतिथियों द्वारा माँ शारदे की प्रतिमा पर पुष्पार्पण औऱ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। संस्था की महासचिव डॉ किरण कैंथवाल ने की। 

अध्यक्ष राजेश गौड़ ने अपनी  कविता पढ़ते हुए कहा कि,,मैने कभी अपने आंसुओं का हिसाब नहीँ रखा, वर्षों पुराने मेरी डायरी के सभी पन्ने आज भी गीले हैँ। जिसे काफी पसंद किया गया।

मुख्य अतिथि गीतकार कमल सक्सेना ने श्रंगार के मुक्तक से अपना काव्य पाठ शुरू किया,,गीत पढ़ते हुए कहा कि..

  • "ऐसी चपल दामिनी दमकी शीशे का घर टूट गया। 
  • कहते हैँ उसके हाथों में आकर साहिल छूट गया। 
  • ये लगता है नदी किनारे फिर से रांझा छला गया। 
  • कब तक वह परदेशी रहता आखिर इक दिन चला गया।

जिस पर सभी ने जोरदार तालियाँ बजायीं। संस्था की संरक्षक निर्मला सिंह ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि,,संयोग़ वियोग मिले हैँ कांटों में फूल खिले हैँ। यह अजब योग देखा है जो बिछड़े वही मिले हैँ।

संस्था अध्यक्ष दीप्ती पांडे नूतन ने अपनी कविता कुछ ऐसे पढ़ी,,,

  • चलो आज झूठी मुस्कानों को छोड़ रोया जाये। 
  • क्यों न किसी अज़नबी के घाव को धोया जाये। 
  • अधिक पाने की चाह ने कर दिया सबको अकेला, 
  • क्यों न इस दर्दे ग़म को दूर किया जाये। 
  • जिसने सभी की वाह वाही लूटी।

उपाध्यक्ष अल्पना नारायण ने अपनी ग़ज़ल पढ़ते हुए कहा कि,,किस पर भरोसा करे कौन कैसे सभी लोग दिखते मुखौटा लगाये। ने वातावरण को भावुक बना दिया।

महाचिव किरण कैंथवाल ने कहा कि सवालों के घेरों में तुझको रोज पाती हूँ। मची कैसी हलचल है तेरे औऱ मेंरे दिल में, यही सब सोचकर मैं तो ख़ुद ब ख़ुद डूब जाती हूँ। सभी को अच्छी लगी।

इन्द्रेव त्रिवेदी ने गीत पढ़ते हुए कहा कि अगर आप यूँ मुस्कराते रहेंगे। तो सच मानिये हम गाते रहेंगे। नहीँ जिन्दा रहना युगों से युगों तक, परों के घरौंदे बनाते रहेंगे।

मोना प्रधान ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि,, चंद सांसों का खेल है ये छोटी सी ज़िन्दगी, कौन बांध सका मुट्ठी में ये केवल बहता  पानी,, आध्यात्मिक चेतना का संचार कर गयी।

चित्रा जौहरी ने बहुत अच्छी आध्यात्मिक कविता पढ़कर वाह वाही लूटी।

सुशीला धष्माना ने कहा कि रोशनी यों चमकती रही रात भर। घोंसले को कहीं तो ठिकाना मिले, रोज चिड़िया भटकती रही रात भर,, बहुत सराही गयी।

मीरा मोहन ने कहा कि मौत ने मुझसे कहा मैं तुझको लेने आ रही हूँ। ज़िन्दगी बोलो डरो मत मैं अभी मुस्करा रही हूँ सबके दिलों में उतर गयी।

शैलज़ा  ने कहा कि ख़ो दिया मैने पाकर किसी को, आग लग जाये ऐसी ज़िन्दगी को।

उमा शर्मा ने कहा कि. कौन कहता है नारी भारत में अबला है।

डॉ विभोर व बीनू सिन्हा ने ने कार्यक्रम की भूरि भूरि प्रसंशा की।  आज की गोष्ठी की संयोजक मोना प्रधान ने सभी का आभार प्रकट किया औऱ सबको स्वादिष्ट भोजन के लिये आमंत्रित किया । संचालन इंद्रदेव त्रिवेदी ने किया।

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