Skip to main content

साइकिल रह जाएगी अकेले.?


  • यूपी में कांग्रेस कर रही दबाव वाली सियासत..!
  • हाथी-हाथ एक साथ, सपा का बिगाड़ेगी खेल?
लखनऊ। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का समाजवादी पार्टी के बजाय बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन से अधिक फायदा होने के बयान ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है।

कांग्रेस और सपा के साथ बसपा के नेता भी इमरान मसूद के बयान के सियासी निहितार्थ तलाशने में जुट गए हैं। 

बता दें कि इमरान मसूद आजकल बेबाक तरीके से बोले रहे हैं। इमरान मसूद का बोलना सपा के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है, क्योंकि कांग्रेस ने अब यूपी में अपने आप को मजबूत करने के लिए नया प्लान तैयार कर लिया है।

कहीं बदलने वाला तो नहीं कांग्रेस का खेल!

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव कहते हैं कि कांग्रेस के साथ उनका सब कुछ ठीक चल रहा है,लेकिन जिस तरह कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार गठबंधन को लेकर बयान दे रहे हैं, उससे यही लगता है कि कुछ ठीक नहीं चल रहा है। 

कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव के की सपा की बातें मानने वाली नहीं है। सियासी तौर से देखा जाए तो इमरान मसूद बिना कांग्रेस की हरी झंडी के इतने तल्ख बयान नहीं दे सकते हैं, वह भी तब जब कांग्रेस हाई कमान कि वह सीधे टच में हैं।

कांग्रेस ले सकती है बसपा का साथ!

कांग्रेस और सपा नेताओं के बीच अक्सर बयानबाजी से गठबंधन खत्म होने का कयास लगता रहता है,लोकसभा चुनाव के बाद एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी में बढ़ोतरी भी हुई है। लोकसभा चुनाव में 6 सीटें जीतने के बाद कांग्रेस यूपी में अपना पैर मजबूती से जमाने के लिए जुटी है,जिसके लिए सपा से अधिक बसपा फायदेमंद लग रही है। 

अब सभी के दिमाग में यही सवाल है कि क्या कांग्रेस दबाव बना कर बसपा का साथ ले सकती है,उधर सपा के प्रवक्ता का दावा है कि कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में 35 सीटों से ज्यादा नहीं दिया जाएगा।

कांग्रेस क्यों कर रही दबाव वाली सियासत!

कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी का कहना है हम सभी का एक ही सामूहिक उद्देश्य है कि 2027 में भाजपा को उत्तर प्रदेश में सत्ता से बाहर करना,जनता 2027 में इंडिया गठबंधन को जिताने का मन बना चुकी है।

यूपी में कांग्रेस के सामने बहुजन समाज पार्टी की सिवा कोई विकल्प नहीं?

सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व और समाजवादी पार्टी बात करेंगे, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर सपा पर दबाव बनाने की राजनीति कांग्रेस क्यों कर रही है, क्या कांग्रेस को 2027 में अपने रास्ते अलग करने हैं। यूपी में कांग्रेस के सामने बहुजन समाज पार्टी की सिवा कोई विकल्प नहीं है।

कांग्रेस-बसपा में बनेगी बात?

सियासत में संभावनाओं से इनकार कभी भी नहीं किया जा सकता है। सियासत में हमेशा से संभावनाओं का खेल होता है। ऐसे में जिस तरह से इमरान मसूद लगातार सपा पर हमलावर है उससे साफ तौर से नजर आ रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं आने वाले दिनों में यह कहानी सपा के ऑफिस से होते हुए बसपा तक पहुंच जाएगी।

Comments

Popular posts from this blog

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

“अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी: उजड़ने की कगार पर संजय कॉलोनी भाटी माइंस”

जितेंद्र कुशवाहा दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित संजय कॉलोनी भाटी माइंस के लोग आज भी अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही कॉलोनी है, जिसे वर्ष 1976 में दिल्ली सरकार ने विधिवत बसाया था और यहां के निवासियों को पट्टे भी दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें एक स्थायी ठिकाना मिल गया है। लोग गांव से आए, मजदूरी की, और जीवनभर की कमाई लगाकर ईंट-पत्थर से अपने आशियाने खड़े किए। लेकिन 1991 में अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी ने यहां के निवासियों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया। अधिकारियों की एक गलत रिपोर्ट और अदूरदर्शी निर्णय के कारण पूरी कॉलोनी को रिज क्षेत्र (संरक्षित वन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि 15 साल पहले जिन घरों को कानूनी मान्यता दी गई थी, वे अचानक “अवैध” हो गए। आज हालात यह हैं कि सरकार और प्रशासन उन्हीं घरों को तोड़ने पर आमादा है, जिन पर लोगों ने अपना खून-पसीना बहाकर जीवन की पूंजी लगा दी थी। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए नव युवक ग्राम विकास समिति के सदस्य एवं ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ के संस्थापक समाज...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...