Skip to main content

बुद्ध होना आसान कहां था!

Vinod Kumar Kushwaha 

लखनऊ। राष्ट्रीय कवि संगम लखनऊ उत्तर इकाई के तत्वाधान में भूषण साहित्य संस्थान के स्थापना दिवस पर बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष में ललित जोशी जानकीपुरम लखनऊ आवास पर कवि गोष्ठी संपन्न हुई।  

कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु व कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हास्य व्यंग्य कवि विजय तन्हा ने मां शारदे के चित्र समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। 

मां शारदे की वंदना कवयित्री अनीता मौर्य नवजात ने की और मंच का संचालन हास्य कवि संदीप अनुरागी ने किया। 

कार्यक्रम अध्यक्ष साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा -

  • तोड़ सीजफायर तूने किया है कमीनापन, 
  • जान बख्श दी है आगे नहीं बच पायेगी।
  • भारतीय सैनिकों ने भरी जो हुंकार,
  • रौद्र बोटी नहीं एक भी सलामत बच पायेगी।
  • आप औकात अपनी न भूलो शहबाज, 
  • वरना चौदहवीं सदी हो अब सच जायेगी।
  • संख्या कितनी है बनी चटनी तो 
  • हर हिंदुस्तानी की चपाती लौं नहीं पहुंच पायेगी।।

वरिष्ठ हास्य कवि अनिल बांके ठहाका ने यूं हंसाया-

  • रिश्ते में‌ ससुराल की, होती बात नवीन।
  • बीवी से होती अधिक, साली में प्रोटीन।।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विजय तन्हा ने भगवान बुद्ध पंक्तियां पढ़ते हुए कहा - 

  • ड्राइंग रूम में सजे, मिले बुद्ध भगवान। 
  • जीवन चरित्र से सदा, दिखे वहीं अनजान।।

   बाराबंकी से पधारे गीतकार संजय सांवरा ने कहा - 

  • फिर वही धन तलाशता है मन। 
  • एक सावन तलाशता है मन। 
  • जिंदगी की तपन से व्याकुल है, 
  • कोई चंदन तलाशता है मन।।
बलरामपुर से पधारी डा. ममता परिहार ने कहा - 

  • अंतर्मन की सघन बेदना का न कोई छोर।
  • न जाने क्यों इस जगत से बंधी है जीवन डोर। 

 मंच संचालक हास्य कवि संदीप अनुरागी कहा - 

  • चाची जी हमारी नीला ड्रम मंगाइन जबसे।
  • चाचा जी हमारे राइट टाइम वहे दिन से। 
अनीता मौर्य नवजात ने भगवान बुद्ध को समर्पित रचना pढी

  • बुद्ध होना आसान कहां था।
  • ह्रदय परिष्कृत और अंतर का 
  • शुद्ध होना आसान कहां था। 
  • बुद्ध होना आसान कहां था। 

डा. अर्चना मौर्य ने भी बुद्ध को याद किया - 

  • सोता हुआ मुझे छोड़कर वन को चले गये तुम प्रियवर।
  • अन्तर्मन में प्रश्न बड़ा है यही प्रश्न सौ बार खड़ा है।

संदर्भ मौर्य ने सभी उपस्थित जनों का स्वागत किया व रोशनी कुशवाहा ने आभार व्यक्त किया।

Comments

Popular posts from this blog

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

“अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी: उजड़ने की कगार पर संजय कॉलोनी भाटी माइंस”

जितेंद्र कुशवाहा दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित संजय कॉलोनी भाटी माइंस के लोग आज भी अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही कॉलोनी है, जिसे वर्ष 1976 में दिल्ली सरकार ने विधिवत बसाया था और यहां के निवासियों को पट्टे भी दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें एक स्थायी ठिकाना मिल गया है। लोग गांव से आए, मजदूरी की, और जीवनभर की कमाई लगाकर ईंट-पत्थर से अपने आशियाने खड़े किए। लेकिन 1991 में अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी ने यहां के निवासियों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया। अधिकारियों की एक गलत रिपोर्ट और अदूरदर्शी निर्णय के कारण पूरी कॉलोनी को रिज क्षेत्र (संरक्षित वन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि 15 साल पहले जिन घरों को कानूनी मान्यता दी गई थी, वे अचानक “अवैध” हो गए। आज हालात यह हैं कि सरकार और प्रशासन उन्हीं घरों को तोड़ने पर आमादा है, जिन पर लोगों ने अपना खून-पसीना बहाकर जीवन की पूंजी लगा दी थी। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए नव युवक ग्राम विकास समिति के सदस्य एवं ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ के संस्थापक समाज...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...