लखनऊ। राष्ट्रीय कवि संगम लखनऊ उत्तर इकाई के तत्वाधान में भूषण साहित्य संस्थान के स्थापना दिवस पर बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष में ललित जोशी जानकीपुरम लखनऊ आवास पर कवि गोष्ठी संपन्न हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु व कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हास्य व्यंग्य कवि विजय तन्हा ने मां शारदे के चित्र समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मां शारदे की वंदना कवयित्री अनीता मौर्य नवजात ने की और मंच का संचालन हास्य कवि संदीप अनुरागी ने किया।
- तोड़ सीजफायर तूने किया है कमीनापन,
- जान बख्श दी है आगे नहीं बच पायेगी।
- भारतीय सैनिकों ने भरी जो हुंकार,
- रौद्र बोटी नहीं एक भी सलामत बच पायेगी।
- आप औकात अपनी न भूलो शहबाज,
- वरना चौदहवीं सदी हो अब सच जायेगी।
- संख्या कितनी है बनी चटनी तो
- हर हिंदुस्तानी की चपाती लौं नहीं पहुंच पायेगी।।
वरिष्ठ हास्य कवि अनिल बांके ठहाका ने यूं हंसाया-
- रिश्ते में ससुराल की, होती बात नवीन।
- बीवी से होती अधिक, साली में प्रोटीन।।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विजय तन्हा ने भगवान बुद्ध पंक्तियां पढ़ते हुए कहा -
- ड्राइंग रूम में सजे, मिले बुद्ध भगवान।
- जीवन चरित्र से सदा, दिखे वहीं अनजान।।
बाराबंकी से पधारे गीतकार संजय सांवरा ने कहा -
- फिर वही धन तलाशता है मन।
- एक सावन तलाशता है मन।
- जिंदगी की तपन से व्याकुल है,
- कोई चंदन तलाशता है मन।।
- अंतर्मन की सघन बेदना का न कोई छोर।
- न जाने क्यों इस जगत से बंधी है जीवन डोर।
मंच संचालक हास्य कवि संदीप अनुरागी कहा -
- चाची जी हमारी नीला ड्रम मंगाइन जबसे।
- चाचा जी हमारे राइट टाइम वहे दिन से।
- बुद्ध होना आसान कहां था।
- ह्रदय परिष्कृत और अंतर का
- शुद्ध होना आसान कहां था।
- बुद्ध होना आसान कहां था।
डा. अर्चना मौर्य ने भी बुद्ध को याद किया -
- सोता हुआ मुझे छोड़कर वन को चले गये तुम प्रियवर।
- अन्तर्मन में प्रश्न बड़ा है यही प्रश्न सौ बार खड़ा है।
संदर्भ मौर्य ने सभी उपस्थित जनों का स्वागत किया व रोशनी कुशवाहा ने आभार व्यक्त किया।

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