लखनऊ। राष्ट्रीय कवि संगम लखनऊ उत्तर इकाई के तत्वावधान में पावस कविगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय मंत्री साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु ने की। ललित जोशी के जानकीपुरम स्थित आवास पर आयोजित कविगोष्ठी का संचालन अतुल बाजपेई ने किया। सरस्वती की वंदना करते हुए वंदना शर्मा ने याचना की:-
- विश्वशक्ति बने देश वरदान दो।
- विश्व गुरु हो पुनः श्रेष्ठतम ज्ञान दो।।
- पहलगाम में यह जो तुमने नया बवाल किया है,
- निर्दोषों का खून बहाकर बड़ा कमाल किया है।
- बूंद बूंद लोहू का तुमको अब हिसाब देना होगा,
- तुमने मानव मारे हैं, बकरा नहीं हलाल किया है।।
संचालन कर रहे अतुल बाजपेई ने भारत की महिमा का बखान करते हुए कहा:-
- त्याग तप बलिदान की मिलती जहां पहचान है।
- स्वामी विवेकानंद सा जन्मा जहां इंसान हैं।।
- इस धरा की धूल मे पलकर बने भगवान भी,
- देश है यह वो हमारा नाम हिंदुस्तान है।।
मुख्य अतिथि लखीमपुर खीरी से पधारे वरिष्ठ कवि डा. शिव शर्मा विरक्त के छंदों ने सभीका मन मोह लिया।
- संकट हो जिस कंटक से जड़ से कट जाय सदा के लिए।
- हो मन की मनको खलती मन से हट जाय सदा के लिए।
- दर्द मिटा न सका पर यत्न किया घट जाय सदा के लिए।
- क्यों विष का विष तत्व मिटे विष ही मिट जाय सदा के लिए।।
कविगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कमलेश मौर्य मृदु ने विभिन्न विषयों पर अपनी रचनाएं सुनाकर गोष्ठी को गरिमा प्रदान की:-
- तीन समस्याएं बड़ी तगड़ी हैं भारत में,
- इन्हें हल करें वह पात्र हैं इनाम के।
- पहली समस्या किसी आदमी पे काम नहीं
- हर कोई घूमता बगैर काम-धाम के।
- दूसरी समस्या काम के लिए मिले
- न व्यक्ति करते बहाने आज-कल सुबह शाम के।
- तीसरी समस्या काम के लिए रखो
- जिन्हें भी वह लोग होते नहीं "मृदु"किसी काम के।।
आयोजक संदर्भ मौर्य ने उपस्थित जनों का स्वागत किया व ललित जोशी ने आभार व्यक्त किया। मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि को संस्कार भारती की मासिक पत्रिका कला कुंज भारती का नवीनतम अंक भेंटकर अध्यक्ष द्वारा सम्मानित किया गया। हार्टिकल्चर के विशिष्ट अधिकारी निपुण शर्मा व दीपू चौहान की उपस्थिति उल्लेखनीय है।

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