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"आगामी दो वर्षों में अपने-अपने जाति के नेताओं से सावधान रहने की जरुरत है"- मनोज मानव

कुर्सी की लालच में जनता को धोखा देने को तैयार ऐसे लोग, जिन्हें दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के हितों से कोई लेना-देना नहीं है, ऐसे लोंगो से सावधान रहने की जरूरत है। आगामी दो वर्ष दलित, पिछड़ा और आदिवासी समाज के लिए परीक्षा की घड़ी हैं। इनकी जागरूकता और सावधानी, दोनों की परीक्षा होगी, जो इन वर्गों के स्थाई भविष्य को निर्धारित करेगी।


पूर्व में हुए चुनाव विकास के वादों और राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़े गए थे, लेकिन आगामी दो वर्ष व्यवस्था को बचाने, जनता के अधिकारों को सीमित होने से बचाने, उनके हक़ों को लूटे जाने से रोकने और देश को पूंजीपतियों के हाथों निगलने से बचाने का समय होगा। आज देश-प्रदेश में इन वर्गों के लोग तंगहाली और मजबूरी की जिंदगी जीने को विवश हैं, जबकि पूँजीपति मालामाल हो रहे हैं और साधन सम्पन्न जनप्रतिनिधि अपने वीआईपी ऐशोआराम में मुग्ध हैं।


आने वाले दो वर्षों में दलित, पिछड़े व आदिवासियों के साथ किये गये छल और करतूतों को छिपाने के लिए कोई भी षड्यंत्र रचा जा सकता है। झूठे वादों, भ्रामक एजेंडों और लुभावनें, प्रलोभनों का सहारा, जैसे की पहले भी लिया जाता रहा है अब और बड़े पैमाने पर लिया जायेगा। इन वर्गों की जातियों के नेताओं को बढ़ावा देकर, उनके नेताओं को सशक्त दिखाकर वोट हासिल करने का दिखावा भी किया जायेगा, लेकिन यह छल इन वर्गों के लोग देख चुके हैं और उसकी सजा भी भुगत रहे हैं। कमजोर वर्गों के जनप्रतिनिधि सत्ता के हाथों कठपुतली बनकर रह गए हैं, जिनका उपयोग केवल दिखावे के लिए हो रहा है।


इसलिए, इन वर्गों को सावधान रहने की जरूरत है। अपनी-अपनी जाति के नेताओं से सतर्क व सावधान रहें। अपने भविष्य को किसी के हाथों में सौंपने से पहले सौ बार सोचें। सुनियोजित षड्यंत्रों, लुभावने वादों और कुर्सी की लालच में अपने ही लोगों को बेचने के लिए तत्पर जनप्रतिनिधियों से बचें। समय रहते जागरूक और संगठित होकर इस छल को पहचानें और अपने हितों की रक्षा करें। तभी आपका भविष्य सुरक्षित रह सकता है।

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