- गणित को नई दिशा देने वाले रत्नेश शाक्य को एक बार फिर सम्मान..
- शोध कार्यों को मिल रहा राष्ट्रीय स्तर पर गौरव..
मैनपुरी। गणित को केवल कठिन सूत्रों और डरावने संख्याओं का खेल मानने वालों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरे हैं गणितज्ञ रत्नेश शाक्य, जिन्हें उनके क्रांतिकारी गणितीय शोध कार्यों के लिए एक बार फिर सम्मानित किया गया है।
देव नर्सिंग होम, भोगांव रोड, मैनपुरी में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान डॉ. कृपाल सिंह यादव (निदेशक, देव नर्सिंग होम एवं पूर्व चिकित्सा अधिकारी मैनपुरी), संवेदना फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर धर्मवीर सिंह राही, जनपद प्रभारी शैलेन्द्र सिंह, तथा डॉ. कृष्णा शर्मा द्वारा प्रदान किया गया।
रत्नेश शाक्य की कुछ उल्लेखनीय गणितीय खोजें:
विभाज्यता का महासूत्र
दशक नियम
विभाज्यता का तीव्रतम महासूत्र
संख्या ÷ 0 का नवाचार
इन सभी खोजों ने न केवल गणित को सरल और तार्किक बनाया है, बल्कि इसे छात्रों के लिए आकर्षक और जीवनोपयोगी भी बना दिया है।
अब तक के प्रमुख सम्मान और उपलब्धियाँ:
रत्नेश शाक्य को इससे पूर्व दिल्ली, पंजाब, प्रयागराज, प्रतापगढ़, आगरा समेत कई शहरों में राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
इनके गणितीय लेख देश की प्रमुख राष्ट्रीय पत्रिकाओं व शैक्षणिक वेबसाइट्स पर प्रकाशित हो चुके हैं।
इनके सूत्रों की सराहना देश भर के शिक्षक, प्रोफेसर एवं गणितज्ञ कर चुके हैं।
भारत सरकार ने रत्नेश शाक्य को कई गणितीय सूत्रों पर कॉपीराइट प्रमाणपत्र प्रदान किए हैं, जो विश्व के 181 देशों में मान्य हैं।
विभाज्यता के महासूत्र की विशेषताएँ:
केवल एक सूत्र से सभी प्राकृतिक संख्याओं के लिए विभाज्यता के नियम बनाए जा सकते हैं।
अब परंपरागत नियमों को रटने की आवश्यकता नहीं — यह सूत्र है याददाश्त का समाधान।
विभाज्यता नियमों को अब कुछ ही पलों में गढ़ा जा सकता है, जिससे समय की भारी बचत होती है।
इस सूत्र की मदद से सभी पूर्ण संख्याएँ 10 संख्या परिवारों में विभाजित की जा सकती हैं, जिससे गणित को और अधिक सरल व व्यवस्थित किया जा सकता है।
इस सम्मान अवसर पर इंजीनियर धर्मवीर सिंह राही ने कहा,
“रत्नेश शाक्य जैसे लोग भारत के लिए एक अनमोल धरोहर हैं। उनके कार्यों से आज की पीढ़ी गणित को फिर से अपनाने को तैयार हो रही है।”
डॉ. कृपाल सिंह यादव ने कहा,
“जब बच्चे गणित से डरने लगे हैं, ऐसे में रत्नेश जी की खोजें उन्हें गणित का मित्र बना रही हैं — यह एक असाधारण उपलब्धि है।”
शैलेन्द्र सिंह ने भी कहा,
“समय की माँग है कि रत्नेश शाक्य जैसे गणितज्ञों को राष्ट्रीय मंच मिले ताकि देश के कोने-कोने में गणित की रोशनी फैले।”

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