तीसरे दिन भी ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, "सड़क नहीं तो वोट नहीं" के लगे नारे
रत्नेश शाक्य
घिरोर (मैनपुरी)।नगला खुशाली गांव में सरकारी प्राथमिक विद्यालय कोसमा द्वितीय के विलय के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तीसरे दिन भी उग्र रूप ले चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता व संवेदना फाउंडेशन के प्रमुख इंजीनियर धर्मवीर सिंह राही के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने "स्कूल नहीं तो वोट नहीं", "सड़क नहीं तो वोट नहीं" जैसे नारे लगाकर सरकार को कड़ा संदेश दिया।
गौरतलब है कि प्राथमिक विद्यालय कोसमा द्वितीय नगला खुशाली का विलय कोसमा प्रथम में कर दिया गया है, जिससे आक्रोशित ग्रामीण पहले दिन से ही प्रदर्शन पर डटे हुए हैं।
शिक्षा के अधिकार पर हमला:
इंजीनियर धर्मवीर सिंह राही ने कहा कि
"गांव की आत्मा उसका विद्यालय होता है। उसे बंद करके सरकार हमारे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। प्रदेश में शराब के ठेके खोले जा रहे हैं, लेकिन गांव के स्कूल बंद किए जा रहे हैं – हम इस काले कानून का पुरजोर विरोध करेंगे।"
जर्जर सड़क बनी बड़ा संकट:
स्कूल के बंद होने के बाद बच्चों को तीन किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ेगा, जबकि गांव की संपर्क सड़क की हालत इतनी खस्ता है कि रोजाना लोग गड्ढों में गिरकर घायल हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि
"ऐसी सड़क पर नन्हे बच्चों को भेजना दुर्घटना को न्योता देना है। सरकार को पहले संपर्क मार्ग बनाना चाहिए, फिर कोई फैसला लेना चाहिए।"
लोकतांत्रिक चेतावनी:
गांव वालों ने एकजुट होकर ऐलान किया –
"जब तक स्कूल का विलय रद्द नहीं होता और संपर्क मार्ग की मरम्मत नहीं की जाती, हम आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे।"
गांव का जन सैलाब:
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख लोग:
पूर्व प्रधान मशर्रत अली, इंजीनियर धर्मवीर सिंह राही, कृपाल सिंह यादव, रामगोपाल, रामदास, अनेग सिंह, नेत्रपाल सिंह, बलवीर सिंह, ओमवीर सिंह, वीरभान, राजबीर सिंह, कायम सिंह, प्रेम सिंह, सीटू, अभिषेक, अखिलेश, नरेंद्र सिंह, चमेली देवी, पुष्पा देवी, शाक्षी, सरला देवी, विनीता देवी, इंद्रवती, गरिमा देवी, और सैकड़ों ग्रामीण।
अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर ध्यान देता है या फिर यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा।
रिपोर्ट: नगला खुशाली, घिरोर ब्लॉक, मैनपुरी
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