विशेष संवाददाता
बिसवां- सीतापुर कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष में आयोजित वर्चुअल कवि सम्मेलन में वीर बलिदानियों को याद किया गया मुख्य अतिथि की भूमिका में अपने जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु ने कारगिल में मारे गए अपने वतन के वीर सपूतों को नमन कर एक बलिदानी की बहन के उद्गार व्यक्त करते हुए कहा
मैं दुर्गावती लक्ष्मीबाई बनकर सीमा पर जाऊंगी।
अपने भाई की शहादत का बदला भाई से चुकाऊंगी।
घुसपैठिए जो घुस आए वे भागें या उनकी बलि होगी।
लहरें लाहौर पे राष्ट्रध्वज तब सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सिंगरौली मध्य प्रदेश से वरिष्ठ साहित्यकार उमेश कुमार गुप्त ने वीर गाथा का वर्णन करते हुए एक हृदय स्पर्शी गीत “भारत मां के लाल शहीद, कहां गए ओ लाल हमारे, छोड़के हमको किसके सहारे। देश विराना हो गया प्यारे” सुनाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। अलवर राजस्थान से विभा आर्य ने कहा “ज़ब मैं मरू तब, मेरी दृष्टि उसे दे देना, जिसने कभी सूर्योदय नहीं देखा! मेरा ह्रदय उसे दे देना”, जम्मू से सुषमा देवी ने अपनी बात कुछ तरह कहीं “ कारगिल के उच्च शिखरों पर, हमारे वीरों ने लड़ी अपूर्व लड़ाई, जब अपने प्राणों को दांव लगाकर, भारत राष्ट्र को थी विजय दिलाई“ ।रुड़की उत्तराखंड से ओज कवि किसलय क्रांतिकारी को खूब सराहा गया “कारगिल महासंग्राम में जो भी वीर शहीद हुए, ऐसे उन शहीदों के चरणों में प्रणाम है”, अलवर राजस्थान से सीमा कालरा अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा “देखो दुनिया में कैसा अजब हो रहा, झूठ का ये तमाशा गजब हो रहा”, बीना गुप्ता ने भक्ति रचना सुनाई तो वहीं हापुड़ उत्तर प्रदेश से अन्नपूर्णिमा ने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी “चोटी पे खड़ा है एक इतिहास, सीना ताने वीर जवान,
हिमगिरि की ऊँचाई पर लिखी गई भारत की पहचान”, रांची झारखंड से करुणा सिंह कल्पना ने कहा “मोहब्बत का रंग अभी जिंदा है यारों, हाथों में जब तक तिरंगा है यारों“ जौनपुर से राम जतन पाल की रचना को जमकर वाहवाही मिली।सोनभद्र से कृष्ण कुमार साहनी ने अपनी रचना “हरेक धड़कन शहीदों की शहादत पर समर्पित है, शिराओं में दौड़ते रक्त का हर बिंदु अर्पित है“ सुनाकर सभी का दिल जीत लिया।
इस पूरे कार्यक्रम का शानदार संचालन सोनभद्र के यूथ आइकॉन कविवर अवध बिहारी अवध जी ने किया ।श्याम बिहारी मधुर जी ने अपना हार्दिक आभार प्रकट करते हुए कारगिल के अमर बलिदानियों को नमन किया।
कार्यक्रम अध्यक्ष कवि उमेश गुप्त और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु ने सभी मंचासीन अतिथियों का हृदय पटल से कोटि–कोटि आभार व्यक्त करते हुए सभी सम्मानित साहित्य मनीषियों को कारगिल विजय दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं प्रेषित किया और कहा कि हमारे राष्ट्र के वीर सपूत लोगों के हृदय में सदा-सदा के लिए अविस्मरणीय स्मृति के रूप विद्यमान रहेंगे। राष्ट्र की सुरक्षा और संरक्षा के लिए अपने प्राणों का भी नौछावर करने वाले सभी राष्ट्र प्रहरियों का हम ऋणी रहेंगे।

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