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एपीओ और तकनीकी सहायक के संरक्षण में पंचायतों ने भ्रष्टाचार की हदें पार कर दी

बिना काम के लग रही सैकड़ों मजदूरों की हाजिरी, 

पांच मजदूर काम पर हाजिरी लगा रही 19 की

लेखराम मौर्य

लखनऊ। राजधानी के विकासखंड माल से लेकर मलिहाबाद तक मनरेगा योजना में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। अगर मोटे तौर पर देखा जाए तो वृक्षारोपण के नाम पर फर्जी मजदूरों की हाजिरी लगाकर रोजगार सेवकों, ग्राम प्रधानों तथा सचिवों ने मिलकर बिना काम के लाखों का खेल किया जा रहा है । विकासखंड माल की ग्राम पंचायत आँट गढी सौरा के मजरे जानकी नगर और आंट में निर्माणाधीन आंगनवाड़ी केन्द्रों में कई माह से कम बंद है परंतु यहां 15 मजदूरों की लगातार फर्जी हाजरी लगाई जा रही है ग्राम प्रधान के एक सगे और एक चचेरे देवर इन्हीं दोनों गांव में शिक्षामित्र के पद पर नौकरी कर रहे हैं उन दोनों ने बताया कि यहां कई महीने से काम बंद है क्योंकि आंगनवाड़ी केंद्र स्कूल परिसर में ही बन रहे हैं इसलिए काम उनके सामने होता है। ग्राम पंचायत अकबरपुर में कृष्ण कुमार की बाग से बाजार गांव सीमा तक कई महीने से करीब ढाई सौ मीटर चक मार्ग कागजों में बन रहा है क्योंकि करीब 2 महीने पहले इस पर काम शुरू हुआ था और 20-25 मीटर काम छूट गया था उसी के नाम पर बीच-बीच में 5 से 10 मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है क्योंकि मौके पर कई महीने से काम बंद है। ग्राम पंचायत चंदवारा में जो काम पिछले सप्ताह चल रहा था उसे पर 14 मजदूर काम कर रहे थे और 24 की हाजिरी लगाई जा रही थी। इसी प्रकार ग्राम पंचायत मझौआ में डामर रोड से सरकारी नलकूप तक चक मार्ग पर काम चल रहा है यहां 10,12 मजदूर काम करते हैं और हाजिरी दोगुने मजदूरों की लगाई जा रही है यहां 11:30 बजे धान के खेत में काम कर रही एक महिला ने कहा कि 10, 12 से ज्यादा मजदूर काम पर नहीं आते हैं और तीन-चार घंटे काम करके चले भी जाते हैं। 

ग्राम पंचायत गहदों के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी है क्योंकि पिछले 4 साल से यहां इस कदर भ्रष्टाचार किया गया है कि सुनने वाला भी हैरान रह जाए क्योंकि यहां डामर रोड से कुटिया तक कच्चे मार्ग पर काम चल रहा है जहां लगातार चार पांच मजदूर रोजाना 1 घंटे काम करके खाना पूर्ति करके चले जाते हैं और 19 मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगा दी जाती है। इस कच्चे रास्ते पर इस समय काम की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि वह अभी इतना समतल है कि उसमें किसी प्रकार की काम करने की जरूरत नहीं है तथा जो मजदूर काम कर रहे हैं वह मिट्टी डालने के बजाय किनारे की घास छीलकर और ढालू कर दे रहे हैं जिससे भारी बरसात में रास्ते की मिट्टी कट जाएगी। जब यहां 1 इंच मिट्टी नहीं डाली जा रही है साथ ही केवल घास छीली जा रही है तो कौन सा तकनीकी सहायक इस रास्ते पर काम का भुगतान करवाएगा। इसके पहले भी इस गांव के अधिकांश कच्चे मार्गो में दोबारा काम कराते समय औसतन एक मजदूर द्वारा 1 दिन में आधा मीटर रास्ते पर ही काम किया गया है फिर किस रेसियो से तकनीकी सहायकों ने उनका भुगतान कराया है इसलिए इस पंचायत की गंभीरता से जांच की जाए तो यहां लाखों का घोटाला सामने आएगा। ग्राम पंचायत बदईयां में  वृक्षारोपण के नाम पर तीन मजदूरों को दोगुना कर दिया गया। इसी तरह ग्राम पंचायत उमरावल में वृक्षारोपण के समय मजदूरों की जो फोटो अपलोड की गई है वह फोटो दिसंबर जनवरी की है क्योंकि महिलाएं साल ओढ़ कर खड़ी हैं और आदमी स्वेटर पहने हैं उसे फोटो को देखकर हर ग्रामीण ने कहा कि यह लोग मजदूर नहीं किसी बारात में जा रहे बाराती हैं। 

उत्तर प्रदेश में मनरेगा का यह हाल तब है जब सरकार भ्रष्टाचार के नाम पर जीरो टॉलरेंस का लगातार दावा कर रही है। लेकिन अधिकारी हैं तो बिना कमीशन के काम करने नहीं देना चाहते यह बात प्रधान रोजगार सेवक सभी दबी जुबान से कहते हैं फिर कैसे रुकेगा भ्रष्टाचार?

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