Skip to main content

उ0प्र0 स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ की पूर्व घोषित महासंघ की कार्यसमिति की हुई बैठक

निकाय कर्मचारियों की लम्बित मांगों का समाधान न होने के विरोध में लिया गया आन्दोलन करने का निर्णय - शशि कुमार मिश्र

विशेष संवाददाता

लखनऊ l   महासंघ की प्रदेश कार्यसमिति बैठक नगर निगम लखनऊ स्थित कार्यकारिणी सभागार में श्री शशि कुमार मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, जिसमें महासंघ की ईकाईयों के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित हुये। लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, मेरठ, बरेली, फिरोजाबाद, गोरखपुर, हाथरस, महोबा, चरखारी आदि प्रदेश की ईकाईयों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की तथा उ0प्र0 सरकार/शासन द्वारा निकाय कर्मचारियों लम्बित 13 सूत्रीय मांगों का समाधान गत कई वर्षों से प्रमुख रूप से मा0 मंत्री जी, नगर विकास एवं प्रमुख सचिव, नगर विकास स्तर के साथ-साथ मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव (कार्मिक)/प्रमुख सचिव वित्त/निदेशक स्थानीय निकाय, उ0प्र0 आदि के साथ अनेकोबार आन्दोलन/धरना प्रदर्शन/सांकेतिक कार्यबन्दी/ज्ञापन/बैठक/वार्ता/पत्राचार किये जाने के बाद भी कोई आज तक समस्याओं/निर्णय/आदेश निर्गत नहीं किये जाने पर विवश होकर न चाहते हुए भी दिनांक 09 अक्टूबर, 2025 को प्रदेशव्यापी आन्दोलन/धरना प्रदर्शन लखनऊ स्थित गाॅंधी प्रतिमा हजरतगंज पर विशाल प्रदर्शन कर मा0 मुख्यमंत्री जी, उ0प्र0 सरकार को ’’ज्ञापन’’ जिला प्रशासन के माध्यम से प्रेषित किये जाने का सर्वसम्मत से निर्णय लिया गया। 

आज की बैठक में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि यदि समय रहते निकाय कर्मचारियों की निम्नवत् मांगों का समाधान जिसके सम्बन्ध में पूर्व में बैठक आयोजित कर कार्यवृत्तियाॅं समयबद्ध निर्णय कराने हेतु जारी की गयी है उनपर अब आदेश निर्गत नहीं हुये तो उपरोक्त धरना प्रदर्शन के दिन ही अगले आन्दोलन में प्रदेशव्यापी सभी सेवाओं को बाधित करते हुए अनिश्चिकालीन कार्यबन्दी की घोषणा किया जाना महासंघ की बाध्यता होगी। जिसका सम्पूर्ण उत्तरदायित्व उ0प्र0 सरकार/शासन/नगर विकास/निदेशक, स्थानीय निकाय की होगी।

बैठक के अन्त मेें महासंघ द्वारा घोषित आन्दोलन को सफल बनाने हेतु प्रदेशव्यापी भ्रमण का कार्यक्रम भी सुनिश्चित किया गया जिसमें प्रथम चरण में प्रदेश की सभी 17 नगर निगमों एवं उनके आास-पास नगर पालिका/नगर पंचायत/जलकल (जल संस्थानों) को एकजुट करके आन्दोलन में पूर्ण भागीदारी हेतु प्रेरित किया जायेगा, यह भ्रमण का कार्यक्रम दिनांक 08 सितम्बर, 2025 से गाजियाबाद ईकाई से प्रारम्भ किया जायेगा, जिसमें प्रदेश के प्रमुख पदाधिकारी और प्रदेश की ईकाईयों के प्रतिनिधि भागीदारी करेंगें।

आज की बैठक में मुख्य रूप से निम्नवत् मांगें लम्बित है:-

1-निकाय कर्मचारियों के अकेन्द्रीयित सेवा नियमावली का प्रख्यापन गत दिनांे दि0 22 अप्रैल, 2025 को प्रमुख सचिव, नगर विकास की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिनांक 30 जून, 2025 तक किये जाने का लिखित आश्वासन के बाद भी निर्णय नहीं हुआ। 

2-आउसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, पद के अनुरूप न्यूनतम वेतनमान, भर्ती नीति, भविष्य में रिक्त होने वाले पदों पर समायोजन आदि पर मा0 मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी प्रभावी न हो सका।

3-वर्ष 2001 तक सेवारत् दैनिक वेतन/संविदा कर्मचारियों हेतु प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश दि0 24 फरवरी, 2016 लगभग 09 वर्ष व्यतीत हो जाने के बाद भी विनियमितीकरण न हो सका तथा तदर्थ/धारा-108 पर कार्यरत कर्मचारियों के विनियमितीकरण हेतु प्रदेश सरकार कार्मिक विभाग द्वारा जारी शासनादेश दिनांक 16 दिसम्बर, 2021 लगभग 04 वर्ष व्यतीत होने के बाद भी ऐसे कर्मचारियों का विनियमतीकरण नहीं हो सका। 

4-छठवें वेतन आयोग की संस्तुतियों पर निकायों के लिपिक संवर्ग, राजस्व संवर्ग सहित ऐसे तमाम संवर्ग विद्यमान है जिनपर आज सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियाॅं प्रभावी है परन्तु उनकी वेतन विसंगतियाॅं, पद, वेतन भत्ते एवं इन संवर्गों का पुर्नगठन/उच्चीकरण राज्य कर्मचारियों की भाॅति ढाॅचा एवं अन्य सुविधायें नहीं मिल पा रही है। 

सफाई संवर्ग सहित चतुर्थ श्रेणी के किसी भी संवर्ग को पूरी सेवाकाल में तीन पदोन्नति के अवसर नहीं प्राप्त हो पा रहे है।

पुरानी पेंशन बहाली, 74वाॅं संविधान संशोधन, कैशलेस इलाज व्यवस्था, चालक, कम्प्यूटर आपरेटर आदि संवर्गों का पुर्नगठन नहीं हो पा रहा है आदि 13 सूत्री मांगपत्र वर्ष 2017 से यथावत् लम्बित।

आज की बैठक में शशि कुमार मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष, रमाकान्त मिश्र प्रदेश महामंत्री, राकेश अग्निहोत्री कार्यवाहक अध्यक्ष,  मुन्ना हजारिया प्रदेश प्रवक्ता सहित विनय बाघमार, वेद प्रकाश श्रीवास्तव, मनोज कुमार श्रीवास्तव, कमल कुमार कुशवाहा, ठाॅकुर मिशनपाल, राम सिंह पटेल, महक सिंह, सुखबीर सिंह, फैय्याज हसन, अखिलेश कुमार सिंह, नरेन्द्र खन्ना, विशाल शर्मा, वैभव वैष्र्णेव, जयदेव कौशिक, विजय स्वर्णकार, कुनाल, शैलेन्द्र तिवारी, आनन्द कुमार मिश्र, गोमती त्रिवेदी, सै0 कैसर रज़ा, सुधाकर मिश्र, आर0पी0 सिंह, राम कुमार रावत, मनोज मिश्र, सुनीता भट्ट, मो0 अय्यूब, संजय चन्द्रा, हरि शंकर पाण्डे, मो0 हनीफ, विजय यादव, आकाश गुप्ता, मनोज वर्मा, संतोष श्रीवास्तव, पंकज अवस्थी आदि प्रतिनिधि उपस्थित हुये।

Comments

Popular posts from this blog

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

“अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी: उजड़ने की कगार पर संजय कॉलोनी भाटी माइंस”

जितेंद्र कुशवाहा दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित संजय कॉलोनी भाटी माइंस के लोग आज भी अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही कॉलोनी है, जिसे वर्ष 1976 में दिल्ली सरकार ने विधिवत बसाया था और यहां के निवासियों को पट्टे भी दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें एक स्थायी ठिकाना मिल गया है। लोग गांव से आए, मजदूरी की, और जीवनभर की कमाई लगाकर ईंट-पत्थर से अपने आशियाने खड़े किए। लेकिन 1991 में अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी ने यहां के निवासियों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया। अधिकारियों की एक गलत रिपोर्ट और अदूरदर्शी निर्णय के कारण पूरी कॉलोनी को रिज क्षेत्र (संरक्षित वन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि 15 साल पहले जिन घरों को कानूनी मान्यता दी गई थी, वे अचानक “अवैध” हो गए। आज हालात यह हैं कि सरकार और प्रशासन उन्हीं घरों को तोड़ने पर आमादा है, जिन पर लोगों ने अपना खून-पसीना बहाकर जीवन की पूंजी लगा दी थी। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए नव युवक ग्राम विकास समिति के सदस्य एवं ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ के संस्थापक समाज...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...