Skip to main content

खेल जगत की 25 हस्तियां महापौर के हाथों सम्मानित

खेल दिवस पर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को किया नमन

 
रवि मौर्य

अयोध्या। सर्किट हाउस के सभागार में खेल जगत की 25 हस्तियों को नगर निगम के तत्वाधान में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठ ने खिलाड़ियों एवं कोच को ट्रैकसूट व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। 

इस मौके पर नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार, उपसभापति राजेश गौड़, पार्षद चंदन सिंह, रामशंकर, सौरभ सिंह, सूर्या तिवारी, अजय तिवारी, निखिल श्रीवास्तव, किशन मौर्य, सर्वजीत छोटू, सहायक नगर आयुक्त गुरु प्रसाद पांडे, क्रीड़ा अधिकारी अनिमेष सक्सेना, अनूप दुबे,  रंगेश त्रिपाठी, सरदार सुरेंद्र सिंह, आशीष सूद, केपी सिंह, हेमंत पांडे, देवेशमणि त्रिपाठी, आयोजन समिति के राहुल सिंह, सुनील अवस्थी, रोहित शर्मा, राहुल पाठक, निरंकार पाठक, लालजी शुक्ल, आदि मौजूद रहे।

महापौर ने इस मौके पर खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही नगर निगम में एक और स्टेडियम का निर्माण कराया जाएगा, ताकि अयोध्या नगरी के खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने खिलाड़ियों को हर संभव मदद देने का भी वादा किया। नगर आयुक्त ने कहा कि मेजर ध्यानचंद का योगदान अविस्मरणीय है, उन्हें नमन करना हम सभी के लिए गौरव की बात है। 

नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार पांडे ने बताया कि इस मौके पर फुटबॉल एवं हैंडबॉल के प्रशिक्षक धर्मेंद्र सिंह, हॉकी के योगेश्वर सिंह, कबड्डी के राकेश कुमार मौर्य, वॉलीबॉल के प्रियेश दुबे, बैडमिंटन के अनुपम शुक्ल, बास्केटबॉल के शशांक पांडे, क्रिकेट के अंबुज मिश्र, खिलाड़ियों में एथलेटिक्स के अभिजीत सिंह, पलक तिवारी, शालू कुमारी, कुश्ती के पुष्कर राज शुक्ल, फुटबॉल के रुद्राणी यादव, कबड्डी के वैभव सिंह, बिंदु यादव, बैडमिंटन के दिव्यांश सिंह, लक्ष्मी गौड़, वॉलीबॉल के आदित्य गुप्त, प्रियंका दुबे, बास्केटबॉल के विनीत श्रीवास्तव, दिग्विजय मिश्र, तैराकी के कृष्णा यादव, सृष्टि पाठक, निशानेबाजी के प्रनतपाल सिंह, अर्पिता सिंह, क्रिकेट के विधि यादव आदि शामिल रहे।

Comments

Popular posts from this blog

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

“अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी: उजड़ने की कगार पर संजय कॉलोनी भाटी माइंस”

जितेंद्र कुशवाहा दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित संजय कॉलोनी भाटी माइंस के लोग आज भी अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही कॉलोनी है, जिसे वर्ष 1976 में दिल्ली सरकार ने विधिवत बसाया था और यहां के निवासियों को पट्टे भी दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें एक स्थायी ठिकाना मिल गया है। लोग गांव से आए, मजदूरी की, और जीवनभर की कमाई लगाकर ईंट-पत्थर से अपने आशियाने खड़े किए। लेकिन 1991 में अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी ने यहां के निवासियों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया। अधिकारियों की एक गलत रिपोर्ट और अदूरदर्शी निर्णय के कारण पूरी कॉलोनी को रिज क्षेत्र (संरक्षित वन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि 15 साल पहले जिन घरों को कानूनी मान्यता दी गई थी, वे अचानक “अवैध” हो गए। आज हालात यह हैं कि सरकार और प्रशासन उन्हीं घरों को तोड़ने पर आमादा है, जिन पर लोगों ने अपना खून-पसीना बहाकर जीवन की पूंजी लगा दी थी। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए नव युवक ग्राम विकास समिति के सदस्य एवं ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ के संस्थापक समाज...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...