Skip to main content

नगर निगम की राजनीति सफाई मित्रों को सम्मान से वंचित क्यों?

विशेष संवाददाता

लखनऊ स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर जहां हर वर्ग को सम्मान और प्रेरणा का संदेश मिलना चाहिए, वहीं नगर निगम की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आखिर सफाई मित्रों को प्रशस्ति पत्र और सम्मान से क्यों वंचित रखा गया? ये वही सफाई मित्र हैं, जो दिन-रात मेहनत कर शहर को स्वच्छ रखते हैं। न सिर्फ सफाई, बल्कि कर वसूली, अतिक्रमण हटाना, पेड़ों की कटाई-छटाई और यहां तक कि अधिकारियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने में भी उनकी अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद जब सम्मान का अवसर आता है तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है।

वर्षों से इंतजार में चालक, क्लीनर, राजस्व निरीक्षक व अन्य  मेहनतकश कर्मचारी

इसी तरह राजस्व निरीक्षक भी लंबे समय से सम्मान की आस लगाए बैठे हैं। कर वसूली में वृद्धि करने वाले इन कर्मचारियों को बार-बार निराशा का सामना करना पड़ता है। कभी जोनल कार्यालय से नाम भेजा जाता है, तो कभी मुख्यालय से फोन पर जानकारी दी जाती है। लेकिन हर बार उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। इस निराशा ने अब उनके मनोबल पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।

प्रशंसा तो मिलती है, सम्मान नहीं


प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सफाई मित्रों की प्रशंसा करते नहीं थकते। लेकिन सवाल यह है कि जब असली सम्मान देने का समय आता है, तो आखिर उन्हें क्यों भुला दिया जाता है? क्या इसके पीछे व्यक्तिगत राजनीति और नाराजगियों का खेल छिपा है?


सफाई मित्रों की अहम भूमिका

सफाई मित्रों की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। वे ही हैं जो शहरवासियों को साफ-सुथरा और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराते हैं। ऐसे कर्मियों का सम्मान करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके परिश्रम और समर्पण को मान्यता देना है।


राजनीति से ऊपर उठकर सम्मान की ज़रूरत

नगर निगम के जिम्मेदार लोगों को व्यक्तिगत राजनीति से ऊपर उठकर सफाई मित्रों और कर्मचारियों को वह मान देना चाहिए, जिसके वे हकदार हैं। उनकी मेहनत पर ही नेता अपनी राजनीतिक पहचान और उपलब्धियों की गाथा गढ़ते हैं। स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसर पर उन्हें प्रशस्ति पत्र न देना न सिर्फ छोटी मानसिकता का परिचायक है, बल्कि इससे उनकी आंखों में आंसुओं से छलकती मायूसी भी झलकती है।

Comments

Popular posts from this blog

दलित सफाई कर्मचारी संगठनों को नहीं मिला निमंत्रण, सरकार पर भेदभाव का आरोप

आठवें वेतन आयोग की बैठक में सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा पर भड़का आक्रोश सफाई कर्मचारियों की समस्याएं वेतन आयोग तक पहुंचने से रोकने का आरोप, नेताओं ने जताई नाराजगी मनोज कुमार मौर्य   आगरा। एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सफाई कर्मचारियों के पाॅव धोकर उनके कार्य और परिश्रम को नमन करते हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार की नौकर शाही उत्तर प्रदेश के सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा करके उन्हें हतोत्साहित कर रही है। यह स्थिति असहनीय है। यह बात उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद इलाहाबादी एवं उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुन्दर बाबू चंचल ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के विशेष सचिव पुष्प राज ने उत्तर प्रदेश शासन वित्त ( वेतन आयोग) अनुभाग-2 संख्या- वे आ०-2-387/ दस- 2026 लखनऊ: 08 जून 2026 के द्वारा शासनादेश जारी करते हुए दिनांक 22-23 जून 2026 को लखनऊ में आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के सदस्य की होने बाली बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के अलग अलग विभागों के 24 कर्म...

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...