विशेष संवाददाता
लखनऊ/नई दिल्ली समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं की समाज के प्रति उदासीनता एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि इसका प्रमुख कारण बदलती जीवनशैली, सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रभाव और व्यक्तिगत सफलता की अंधी दौड़ है। आज का युवा अपने करियर, नौकरी और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं में इतना व्यस्त है कि सामूहिक जिम्मेदारियों और सामाजिक सरोकारों के लिए समय और ऊर्जा नहीं दे पा रहा है।
जितेन्द्र कुशवाहा के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में भी सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा-भाव की पर्याप्त शिक्षा का अभाव है, जिससे युवाओं में समाज के प्रति संवेदनशीलता कम हो रही है। राजनीति और सामाजिक संगठनों में पारदर्शिता की कमी तथा भ्रष्टाचार ने भी युवाओं के विश्वास को कमजोर किया है।
उन्होंने कहा कि युवाओं में यह धारणा बन गई है कि समाज सुधार का कार्य केवल कुछ खास लोगों का दायित्व है, जबकि सच्चाई यह है कि समाज का विकास सभी की सहभागिता से ही संभव है। यदि बचपन से ही नैतिक मूल्यों, सेवा, सहयोग और नागरिक कर्तव्यों की शिक्षा दी जाए, तो युवा न केवल जागरूक होंगे बल्कि समाज के निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
जितेन्द्र कुशवाहा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने कौशल, ऊर्जा और विचारों का उपयोग केवल निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज की उन्नति के लिए भी करें। यही सच्ची देशभक्ति है।

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