विशेष संवाददाता
भारत एक ऐसा देश है जिसकी पहचान उसकी अनोखी और बहुरंगी संस्कृति से होती है।
यहाँ की भाषा, कला, संगीत, नृत्य, भोजन, त्यौहार और परंपराएँ केवल रस्में नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और इतिहास का जीवंत प्रमाण हैं। यही कारण है कि समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा, संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन के संस्थापक, ने अपने विचार रखते हुए कहा कि “संस्कृति हमारे देश की धरोहर है, इसे बर्बाद करने का किसी को कोई हक नहीं है।”कुशवाहा जी का मानना है कि संस्कृति केवल पुराने रीति-रिवाजों का संग्रह नहीं, बल्कि वह आत्मा है जो हर पीढ़ी को जोड़ती है। हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्षों की तपस्या, ज्ञान और अनुभव से इन परंपराओं को गढ़ा है। इसमें हमारी पहचान, हमारी जड़ों और हमारी नैतिकता की झलक मिलती है। यदि हम इसे खो देंगे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी असली पहचान खोजना कठिन हो जाएगा।
आज के समय में आधुनिकता के नाम पर लोग पश्चिमी जीवनशैली को बिना सोचे-समझे अपनाते जा रहे हैं। फ़िल्म, टीवी, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जहां नई सोच और अवसर दिए हैं, वहीं हमारे पारंपरिक मूल्यों को कमजोर भी किया है। कुशवाहा जी चेतावनी देते हैं कि बदलाव का स्वागत ज़रूरी है, लेकिन यह हमारी जड़ों को काट कर नहीं होना चाहिए। आधुनिकता और परंपरा का संतुलन ही असली प्रगति है।
वे कहते हैं कि परिवार ही संस्कृति का पहला विद्यालय है। बच्चों को घर पर ही हमारी भाषाओं, लोककथाओं, त्यौहारों और आदर्शों से परिचित कराना चाहिए। विद्यालयों में भारतीय इतिहास, साहित्य, योग, शास्त्रीय संगीत और नृत्य को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही सरकार को भी सांस्कृतिक धरोहरों—चाहे वह मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा हों या प्राचीन स्मारक—की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
जितेन्द्र कुशवाहा के अनुसार, “संस्कृति केवल किताबों में नहीं, हमारे आचरण में भी जीवित रहनी चाहिए।” हमें अपनी मातृभाषा का सम्मान, बड़ों का आदर, पर्यावरण का संरक्षण, और सामूहिकता की भावना को अपने जीवन में उतारना होगा। यही भारतीय संस्कृति की असली पहचान है।
वे यह भी कहते हैं कि युवा पीढ़ी को समझना होगा कि सांस्कृतिक विरासत को संभालना सिर्फ़ सरकार या कुछ संगठनों की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। अगर हर व्यक्ति अपने आस-पास के त्योहार, लोककला, हस्तशिल्प और परंपराओं को सहेजेगा, तो हमारी धरोहर आने वाले सैकड़ों वर्षों तक सुरक्षित रहेगी।
अंत में संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन के संस्थापक जितेन्द्र कुशवाहा का संदेश स्पष्ट है—“संस्कृति को नष्ट करने का अधिकार किसी को नहीं है।” इसे बचाना हमारे अस्तित्व को बचाने के बराबर है। आधुनिकता को अपनाइए, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहिए, क्योंकि यही हमारी असली ताकत और पहचान है।


thanks
ReplyDeleteaap jansewa ka kam kar rahe hai