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“अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी: उजड़ने की कगार पर संजय कॉलोनी भाटी माइंस”

जितेंद्र कुशवाहा

दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित संजय कॉलोनी भाटी माइंस के लोग आज भी अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही कॉलोनी है, जिसे वर्ष 1976 में दिल्ली सरकार ने विधिवत बसाया था और यहां के निवासियों को पट्टे भी दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें एक स्थायी ठिकाना मिल गया है। लोग गांव से आए, मजदूरी की, और जीवनभर की कमाई लगाकर ईंट-पत्थर से अपने आशियाने खड़े किए।


लेकिन 1991 में अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी ने यहां के निवासियों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया। अधिकारियों की एक गलत रिपोर्ट और अदूरदर्शी निर्णय के कारण पूरी कॉलोनी को रिज क्षेत्र (संरक्षित वन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि 15 साल पहले जिन घरों को कानूनी मान्यता दी गई थी, वे अचानक “अवैध” हो गए। आज हालात यह हैं कि सरकार और प्रशासन उन्हीं घरों को तोड़ने पर आमादा है, जिन पर लोगों ने अपना खून-पसीना बहाकर जीवन की पूंजी लगा दी थी।


इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए नव युवक ग्राम विकास समिति के सदस्य एवं ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ के संस्थापक समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा,


> “यहां के लोग अपराधी नहीं हैं, बल्कि मेहनतकश मजदूर और ईमानदार नागरिक हैं। जिन लोगों ने अपनी सारी जिंदगी की कमाई लगाकर घर बनाए, अब सरकार उन्हें उजाड़ रही है। यहां के बच्चों का भविष्य अंधकार में है, क्योंकि यदि घर छिन गए तो शिक्षा और रोज़गार सब छिन जाएगा।”




कुशवाहा का मानना है कि सरकार ने जानबूझकर इस मुद्दे पर आंखें मूंद रखी हैं। अफसरों की लापरवाही के चलते यह स्थिति पैदा हुई और आज उसकी सबसे बड़ी कीमत संजय कॉलोनी भाटी माइंस के निवासी चुका रहे हैं।


कॉलोनी के हालात बेहद खराब हैं। यहां न स्वास्थ्य सुविधाएं हैं, न शिक्षा की व्यवस्था, न ही साफ-सफाई का कोई प्रबंध। लोग बीमारी और गरीबी से जूझ रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे, जिनका भविष्य सरकार की जिम्मेदारी है, आज बेघर होने के डर से पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। महिलाएं और बुजुर्ग मानसिक तनाव में जी रहे हैं।


जितेन्द्र कुशवाहा ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि —


1. संजय कॉलोनी को रिज क्षेत्र से बाहर निकाला जाए।



2. जिन परिवारों को पट्टे दिए गए थे, उन्हें कानूनी मान्यता दी जाए।



3. यहां की बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए।



4. बच्चों की शिक्षा और युवाओं के रोजगार के लिए ठोस योजना बनाई जाए।




उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया तो यहां के लोग मजबूर होकर सड़कों पर उतरेंगे और बड़ा आंदोलन करेंगे।


आज संजय कॉलोनी भाटी माइंस का हर निवासी यही सवाल पूछ रहा है कि —

“जिस जमीन पर सरकार ने खुद बसाया और पट्टे दिए, उसी को कैसे रिज घोषित किया जा सकता है? क्या यह जनता के साथ धोखा नहीं है?”


अगर सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो यह समस्या केवल संजय कॉलोनी की नहीं, बल्कि पूरे दिल्ली के उन इलाकों की बन जाएगी, जहां आज भी अफसरशाही की लापरवाही और अनदेखी के चलते हजारों लोग असुरक्षा में जी रहे हैं।

 यह मुद्दा अब केवल घर-आशियाने का नहीं रहा, बल्कि न्याय और इंसाफ की लड़ाई बन चुका है।

Comments

  1. thanks manoj ji
    aapka tahe dil se dhanyvad aap hamare abhiyan mein sahyog kar rahe hai

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