केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा सरकार, तो कैसे हो रही घुसपैठ
केंद्र और राज्य सरकारों की सुरक्षा नीति पर कांग्रेस नें दागे सवाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निवर्तमान महासचिव एवं पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने बयान जारी करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व डीजीपी ब्रजलाल द्वारा हाल ही में किए गए खुलासे ने न केवल प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल दी है, बल्कि यह केंद्र और प्रदेश दोनों सरकारों की सुरक्षा नीति की असलियत भी उजागर करता है। ब्रजलाल ने फेसबुक लाइव कर लखनऊ में बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी का दावा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम ऐसे लोगों से काम करा रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
चौहान ने कहा कि यह कोई पहला मौका नहीं है। इससे पहले लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल भी झुग्गी-बस्तियों में बांग्लादेशी नागरिकों के रहने का दावा कर चुकी हैं। अब सवाल उठता है कि
जब केंद्र में 2014 से नरेंद्र मोदी की सरकार और प्रदेश में 2017 से योगी आदित्यनाथ की सरकार है, तब यह घुसपैठ आखिर कैसे हो रही है?
क्या यह बीजेपी सरकार की नाकामी का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है?
अगर राजधानी लखनऊ में ही विदेशी नागरिक बिना रोक-टोक रह रहे हैं, नगर निगम के ठेकों में काम कर रहे हैं, और भाजपा सरकारें सालों से इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर पाईं — तो यह सीधे-सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि यदि बीजेपी नेताओं के दावे सही हैं, तो यह साबित करता है कि केंद्र और प्रदेश, दोनों सरकारें अपनी मूल जिम्मेदारी—सीमाओं की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ रोकने—में पूरी तरह विफल रही हैं। यह असफलता पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लेकर वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ तक की है।
ऐसी स्थिति में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह को जनता के सामने जवाब देना चाहिए कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और क्यों नहीं उठाए गए?
वहीं, बीजेपी नेता और पूर्व डीजीपी ब्रजलाल के वीडियो में एक शख्स ने खुद को असम का नागरिक होने की बात कहते हुए सीएए/एनआरसी में सत्यापन हो चुकने का तर्क देते हुए सुनायी पड़ रहा है। ऐसे में यदि बीजेपी नेता के ये दावे झूठे या राजनीतिक मकसद से प्रेरित हैं, तो यह भाजपा नेताओं द्वारा जनता को गुमराह करने और समाज में विभाजन फैलाने का शर्मनाक प्रयास है।
असम या पूर्वोत्तर राज्यों से आए वैध नागरिकों को “बांग्लादेशी” बताना न केवल गैरजिम्मेदाराना है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता और भाईचारे पर हमला है।
यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि बीजेपी के नेता अपनी ही सरकार की विफलताओं को छिपाने के लिए संवेदनशील सुरक्षा मुद्दों पर राजनीति कर रहे हैं। यदि ब्रजलाल और मेयर सुषमा खर्कवाल अपने ही शहर में विदेशी नागरिकों को नहीं रोक पा रहे हैं, तो उन्हें अपनी अकर्मण्यता के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।
कांग्रेस पार्टी का मानना है कि लखनऊ में बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी का मुद्दा अब मात्र एक प्रशासनिक विषय नहीं रहा, यह बीजेपी की सुरक्षा नीति, राजनीतिक ईमानदारी और शासन-क्षमता पर जनमत संग्रह बन गया है।
केंद्र और प्रदेश सरकारें बताएं 1-केंद्र सरकार ने पिछले 13 वर्षों में अवैध बांग्लादेशियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने के लिए क्या किया?
2-यूपी में आठ वर्षों में अवैध नागरिकों की पहचान और निष्कासन के लिए क्या कदम उठाए गए?
3-क्या नगर निगम जैसे संस्थान विदेशी नागरिकों को काम दे रहे हैं?
और अगर नहीं, तो बीजेपी नेता जनता को भ्रमित क्यों कर रहे हैं?
कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, पारदर्शी जांच हो, और जनता को बताया जाए कि हकीकत क्या है।
बीजेपी के दो शीर्ष नेताओं के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि या तो सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त है या फिर राजनीतिक लाभ के लिए झूठ फैलाया जा रहा है। दोनों ही स्थितियों में बीजेपी को जनता के प्रति जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
कांग्रेस पार्टी यह मानती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं, जिम्मेदारी चाहिए।
यदि राजधानी सुरक्षित नहीं है, तो फिर “डबल इंजन सरकार” का दावा सिर्फ जुमला साबित होता है।

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