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बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा सरकार के तारीफ में पढ़े कसीदे


 सूरज चौधरी

​लखनऊ बसपा सुप्रीमो मायावती ने 9 अक्टूबर 2025 को अपने संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ में आयोजित एक महारैली में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार की तारीफ 

​तारीफ की वजह: उन्होंने मुख्य रूप से रैली स्थल, यानी कांशीराम स्मारक स्थल के रखरखाव और सौंदर्यीकरण के लिए योगी सरकार (उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार) का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार ने सपा सरकार की तरह स्मारक से संबंधित धन का दुरुपयोग नहीं किया।

​कार्यकर्ताओं में मायूसी: कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी की इस तारीफ से बहुजन समाज के दूर-दराज़ से आए कार्यकर्ताओं में मायूसी का माहौल बन सकता है, क्योंकि पारंपरिक रूप से बसपा का कैडर बीजेपी को अपना मुख्य विरोधी मानता रहा है। इस तारीफ को बसपा की आगे की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाने के तौर पर देखा जा रहा है।

​आकाश आनंद और चंद्रशेखर आज़ाद 'रावण'

​बहुजन समाज की राजनीति में दो युवा चेहरे इस समय चर्चा का विषय बने हुए हैं:

​आकाश आनंद (बसपा): वह बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे हैं और पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें बसपा की बागडोर संभालने वाले युवा चेहरे के रूप में देखा जाता है।

​चंद्रशेखर आज़ाद 'रावण' (आज़ाद समाज पार्टी/भीम आर्मी): वह एक मुखर युवा नेता हैं, जो दलितों और बहुजन समाज के युवाओं पर काफी मजबूत पकड़ रखते हैं। उनकी पार्टी, आज़ाद समाज पार्टी, बसपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। खासकर उत्तर प्रदेश के नगीना लोकसभा सीट से उनकी जीत ने उन्हें एक महत्वपूर्ण बहुजन चेहरे के रूप में स्थापित किया है।

​बीएसपी को संभावित नुकसान और 'आज़ाद समाज पार्टी' की ओर रुझान

​रैली में बीजेपी की तारीफ के बाद यह चर्चा का विषय बन गया है कि इसका बहुजन समाज पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है।

​वोटर का संदेश: यह माना जा रहा है कि इस तरह की तारीफ से बसपा के वोटरों में एक गलत संदेश जा सकता है कि बसपा और बीजेपी के बीच 'अंदरूनी साँठगाँठ' है, जैसा कि कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है।

​आज़ाद समाज पार्टी की ओर रुख: यदि बसपा का पारंपरिक वोटर, खासकर युवा, मायावती की राजनीतिक दिशा से निराश होता है, तो उसके पास चंद्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी की ओर रुख करने का एक स्पष्ट विकल्प मौजूद है। चंद्रशेखर आज़ाद को एक जुझारू और सड़क पर संघर्ष करने वाले नेता के रूप में देखा जाता है, जो बसपा से नाराज़ बहुजन समाज के वोटों को अपनी ओर खींच सकते हैं।

​यह सारा घटनाक्रम भारतीय राजनीति, खासकर उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। 


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