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परिवार चलाना कितना कठिन होता है – जितेन्द्र कुशवाहा

संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन के संस्थापक एवं प्रख्यात समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में परिवार चलाना न केवल एक जिम्मेदारी है, बल्कि यह जीवन की सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की तेज़ रफ़्तार और आर्थिक दबाव ने परिवार की एकता, समझ और प्रेम की भावना को कमजोर किया है।

जितेन्द्र कुशवाहा ने अपने विचार रखते हुए युवाओं को परिवार के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा —

“परिवार चलाना केवल रोटी-कपड़ा और मकान की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, विश्वास और त्याग का संगम है।”

उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी अपने करियर, मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में इतनी व्यस्त है कि परिवार के साथ संवाद कम हो गया है। जबकि सच्चा सुख, स्थिरता और संतुलन परिवार के सान्निध्य में ही मिलता है।


उनका कहना था कि परिवार समाज की सबसे छोटी लेकिन सबसे सशक्त इकाई है। यदि हर व्यक्ति अपने परिवार में प्रेम, सहयोग और जिम्मेदारी का भाव रखेगा, तो पूरा समाज स्वतः सशक्त हो जाएगा। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने माता-पिता का सम्मान करें, बुजुर्गों की सेवा करें और बच्चों को संस्कार दें — यही राष्ट्र निर्माण का वास्तविक आधार है।


जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा —

“जहाँ परिवार मज़बूत होता है, वहीं समाज सशक्त और राष्ट्र समृद्ध होता है। परिवार को संभालना ही सच्ची समाजसेवा है।”


अंत में उन्होंने युवाओं से यह संदेश दिया कि वे अपने जीवन की व्यस्तता के बीच भी परिवार के लिए समय निकालें, क्योंकि परिवार ही जीवन का सबसे बड़ा आधार और सच्चा आश्रय है।

यही ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ का उद्देश्य भी है — परिवार, समाज और राष्ट्र को एक सूत्र में जोड़ना।

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