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भाटी माइंस संजय कॉलोनी में समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा का भव्य स्वागत एवं सम्मान


प्रमुख संवाददाता

नई दिल्ली समाजसेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय एवं संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन के संस्थापक समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा का उनकी कर्मभूमि भाटी माइंस, संजय कॉलोनी में ग्रामवासियों एवं युवा साथियों द्वारा भव्य स्वागत एवं सम्मान समारोह आयोजित कर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में हर्ष, उत्साह और गौरव का वातावरण देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नागरिकों, वरिष्ठ जनों, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर जितेन्द्र कुशवाहा को फूल-मालाओं एवं बुके भेंट कर सम्मानित किया। इस सम्मान समारोह में अपर्णा सर्व सेवा समिति के अध्यक्ष अमित कुमार, लाल बहादुर सिंह, अमन पंडित, उपेंद्र कुमार सिंह, दयानंद कुमार, सागर मुद्दई, नानक चंद ,चंदरपाल ओड , मेहरचंद ओड ,सैफल प्रधान, सचिन ओड, देशराज यादव, राम प्रिय ठाकुर, मनोज कुमार, विकास यादव, दिलीप राठौड़, विशाल राठौड़, श्री चंद्र खम्बरा, दिलीप कुमार, सीताराम कुशवाहा, महेंद्र कुशवाहा, सुबोध पंडित एवं अशोक पंडित सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं युवा साथी उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि जितेन्द्र कुशवाहा केवल एक समाजसेवी ही नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव के सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने शिक्षा के प्रसार, नशा मुक्ति अभियान, पर्यावरण संरक्षण, दहेज मुक्त विवाह, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तथा युवाओं के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निरंतर कार्य कर समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया है। उनके प्रयासों से क्षेत्र में सामाजिक चेतना का विकास हुआ है और युवाओं को सही मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।

युवा साथियों ने कहा कि जितेन्द्र कुशवाहा का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल है। वे सदैव युवाओं को शिक्षा, संस्कार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराते हैं, जिससे समाज में जागरूकता एवं एकता का भाव सुदृढ़ होता है।

स्वागत से अभिभूत जितेन्द्र कुशवाहा ने सभी ग्रामवासियों, युवाओं एवं सम्मान करने वाले साथियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाजसेवा ही उनका धर्म है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास और सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है और वे भविष्य में भी पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ जनकल्याण एवं सामाजिक उत्थान के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाते रहेंगे।

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