समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा, संस्थापक: संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन
नई दिल्ली। भारत के संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के पुरोधा भारतरत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पुण्यतिथि पर समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा, संस्थापक संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन, ने गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें सामाजिक मूल्यों का सबसे बड़ा धरोहर बताया।
जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अम्बेडकर का मंत्र—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—आज भी समाज को नई दिशा देता है। उनका मानना है कि यदि प्रत्येक युवा इस मंत्र को अपनाए तो समाज में जागरूकता, प्रगति और सामाजिक एकता स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने ऐसा भारत बनाने का सपना देखा था जहाँ हर नागरिक को समान अधिकार, न्याय, गरिमा और अवसर मिले। संविधान निर्माण में उनका योगदान भारतीय लोकतंत्र को मजबूत आधार प्रदान करता है और उनकी विचारधारा आज भी सामाजिक सुधार की सबसे बड़ी प्रेरणा है।
जितेन्द्र कुशवाहा ने बताया कि उनका संगठन संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन बाबा साहेब के सिद्धांतों पर चलते हुए शिक्षा जागरूकता, बेटी बचाओ-बेटा पढ़ाओ, नशा मुक्ति, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और सामाजिक न्याय जैसे अभियानों को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
पुण्यतिथि पर उन्होंने समाज से अपील की कि बाबा साहेब के विचारों को केवल याद ही नहीं करना चाहिए, बल्कि जीवन में उतारना चाहिए। सामाजिक समानता, शिक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने अंत में कहा—“बाबा साहेब केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं जो सदैव समाज को न्याय और समानता की ओर मार्गदर्शन करती रहेंगी।”

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