मंजुल भारद्वाज
देश घटना या तारीख से नहीं
सवाल से बदलता है !
जब समझदार,शिक्षित समाज
सत्ता सेवा में लगी बुद्धि
एक साथ भ्रमित होती है
तब विनाश निश्चित होता है !
तर्क जब भीड़ से हारता है
भविष्य की चमक
वर्तमान के सत्य को ढक ले
तब विनाश निश्चित है!
लोभ,भय,उम्मीद की
सामूहिक भ्रम की स्थिति
वर्तमान के सवालों को
गायब कर दें
दर्शन मौन धारण कर ले
तब विनाश निश्चित है!
जब सरकार,संसद,दरबार
प्रेस और भक्त सब मिलकर
किसी मूर्खता को
राष्ट्रीय अवसर घोषित करते हैं
जो सवाल उठाए
उसे देशद्रोही करार दिया जाए
सवाल पूछना सामाजिक
अपराध बन जाए
तब विनाश निश्चित है!
विवेक,नियम,तर्क को छोड़
शिक्षित समाज जब सम्मोहित हो
व्यक्ति पूजा में जुट जाएं
देखते देखते गणपति दूध पीने लगे
तब विनाश निश्चित है!
रोजगार,अवसर,गरिमा,
सर्वधर्म समभाव समाज से
गायब कर दिया जाए
बहुमत को बहुलतावाद
बना दिया जाए
जीवन सम्मान मुफ्त के
दाने दाने पर मोहताज़ हो जाए
वोट को खरीद लिया जाए
तब विनाश निश्चित है!

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