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निगम कर्मियों की मिली-भगत से फर्जी भवन संख्या दर्ज करा, दूसरे की जमीन किया विक्रय- पीड़ित का आरोप

पीड़ित अधिकारियों के चक्कर काटने पर मजबूर

रवि मौर्य

अयोध्या। नगर निगम कर्मियों की मिली-भगत से खाली ज़मीन पर उठी पांच फिट दीवार पर फर्जी भवन मालिक बन बैठे भूमाफिया यही नही फर्जी भवन संख्या के आधार पर कर दिया दूसरे को बैनामा 

पीड़ित भूखंड स्वामी ने बताया कि उसके बाउंड्री वाल वाले भूखंड पर नगर निगम ने दूसरे को भवन मालिक बना कर मकान नंबर दर्ज कर दिया। जानकारी होने पर पीड़ित महीनों से नगर निगम अयोध्या का चक्कर काट रहा है नगर निगम के अधिकारी कर्मचारी कार्रवाई की बात तो करते हैं लेकिन अभी तक नही ख़ारिज हुआ फर्जी भवन स्वामी का नाम।

 विदित हो कि पीड़ित संजय मौर्य ने अपनी पत्नी रेनू मौर्य निवासी बछड़ा सुल्तानपुर जनपद अयोध्या ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड जनौरा अन्दर नगर पालिका में गाटा संख्या 636 में से 75.48 वर्ग मीटर जिसकी चौहद्दी पूर्व में मकान मनोराम मौर्य पश्चिम में रास्ता उत्तर खेत नाटे यादव व दक्षिण मकान ओंकार नाथ श्रीवास्तव को वर्ष 2019 में रजिस्टर्ड बैनामा लिया और खारिज दाखिल करा कर खतौनी स्वामी बना। विपक्षी चालबाजी कर जो कभी उसी गाटा संख्या में हिस्सेदार था उसने अपनी हिस्से की जमीन पहले ही विक्रय कर चुका है।

उसकी नजर खाली पड़ा प्लॉट पर पड़ा षड्यंत्र कर खतौनी में अंकित नाम का फायदा उठाकर फर्जी खतौनी के जरिए विपक्षी ने पीड़ित के भूखंड गाटा संख्या 636 स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड दुर्गा पुरी जनौरा, पांच फिट की चहारदीवारी पर 

कर निर्धारण अधिकारी से मिलकर  दिनांक 24/09/2025 को बगैर किसी जांच पड़ताल के खतौनी के आधार पर, कर निर्धारण करा अपने नाम मकान नंबर दर्ज करा लिया और दर्ज भवन संख्या का लाभ उठाकर 31 दिसंबर 2025 को दूसरे को रजिस्ट्रीकृत बैनामा कर दिया। 

जिसके कारण पीड़ित को अपूर्णनीय क्षति पहुंच रही है।

पीड़ित के भूखंड पर किसी अन्य के नाम भवन संख्या दर्ज होने की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने कर निर्धारण अधिकारी को दिनांक 11/12/2025 मय कागजात खतौनी, बैनामा की छायाप्रति से अवगत कराया परन्तु कोई कार्रवाई न होने पर नगर निगम में मंगलवार को आयोजित जन सुनवाई में दिनांक 13/01/2026 को 03/02/26 को पुनः प्रार्थना पत्र देकर अधिकारियों से न्याय मांग रहा है।

 पीड़ित के भूखंड बाउंड्री वाल पर दर्ज फर्जी दर्ज भवन स्वामी  का नाम न्याय हित में निरस्त किए जाने की मांग किया है ।

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