देश के जानेमाने लागत लेखाकार (Cost Accountant) और भारतीय रक्षा लेखा सेवा (IDAS) के वरिष्ठतम अधिकारी रहे बहादुर मुराव के उपन्यास "सूर्यस्वयंभू और शीतल शक्ति के रहस्य" का विमोचन किया गया. यह पुस्तक उनके निधन के 26 साल बाद आई है. यह पुस्तक मात्र एक कहानी नहीं, बल्कि एक विचारोत्तेजक साइंस फिक्शन है, जो मानवीय जीवन, अध्यात्म और कर्म के गहरे रहस्यों को जोड़ती है. हिंदी भाषा में लिखित यह उपन्यास आपकी कल्पना को नई दिशा देगी.
मुराव साहब के ज्येष्ठ दामाद और संबंधियों ने अपनी श्रद्धाजंलि स्वरूप उनकी इस अंतिम कृति का फरीदाबाद के वाटिका माइंडस्केप्स में विमोचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस मौके पर उनके संबंधी
राम कुमार सिंह, प्रकाश नारायण मुराव, राम मिलन, रवि मुराव, आर के सिंह और एसएनएस कुशवाहा सहित कई लोग मौजूद रहे. इस मौके पर पुस्तक की प्रकाशक, 2A लोटस पब्लिकेशन्स फरीदाबाद की डायरेक्टर अभीषा जैन भी मौजूद रहीं.
बहादुर मुराव, समाज की ऐसी धरोहर हैं, जिन्होंने अपने काबिलियत के बूते जमीन पर रहकर न केवल आसमान छुआ, बल्कि आज भी दैवता स्वरूप पूजे जाते हैं.
मुराव का जन्म साल 1920 में उत्तर प्रदेश के बेहद पिछड़े जिले बस्ती के गांव बभनौली में हुआ था जो आजकल संतकबीर नगर में है. वह बचपन से ही बेहद प्रतिभाशाली थे. इन्होंने यूपी बोर्ड से न केवल हाई स्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त किया, अपितु इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नाकोत्तर (भौतिक विज्ञान) परीक्षा में भी गोल्ड मेडल प्राप्त किया. उन्होंने अंग्रेजों के शासन काल के दौरान 1946 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में सफलता प्राप्त की और भारतीय रक्षा लेखा सेवा अधिकारी बने.
अपने सरकारी कार्यकाल के दौरान ही इन्होंने लंदन से कॉस्ट अकाउंटेंसी की डिग्री हासिल की. इसके बाद भारत में ICWA (Institute of Cost and Works Accountants of India) की स्थापना करवाई. वो काफी समय तक इसके डायरेक्टर भी रहे. मुराव ने लागत लेखांकन (Cost Accounting) के क्षेत्र में कई प्रामाणिक पुस्तकें लिखी हैं, जो संस्थान के छात्रों और पेशेवरों के लिए मार्गदर्शक रही हैं. उनके द्वारा स्थापित बहादुर मुराव एंड कंपनी आज एक प्रमुख वित्तीय सलाहकार फर्म के तौर लोकप्रिय है.

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