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चाय,चर्चा और रंगमंच अपने और अपनों के लिए रंगमंच से जुड़े- डॉ सीमा मोदी

सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी ने टी स्टाल' पर चाय की चुस्कियों के बीच मनाया विश्व रंगमंच दिवस

लखनऊ। विश्व रंगमंच दिवस के पूर्व संध्या  पर आज 'सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी', लखनऊ द्वारा गोमती नगर स्थित नुक्कड़ टी स्टाल' पर एक अनूठे और संवादात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस, विशेषकर परिवारों को रंगमंच की महत्ता और इसके सामाजिक व व्यक्तिगत लाभों से परिचित कराना था। "चाय, चर्चा और रंगमंच: अपने और अपनों के लिए" विषय पर आधारित इस आयोजन में संस्था के सदस्यों ने चाय की दुकान पर मौजूद स्थानीय नागरिकों और युवाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। कार्यक्रम के दौरान संस्था की सचिव  डॉ सीमा मोदी जो खुद रंगमंच कलाकार है ने इस बात पर ज़ोर दिया कि रंगमंच केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और पारिवारिक जड़ों को मज़बूत करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि रंगमंच मतलब ये नहीं कि हम कलाकर बनना चाहते है पर ये है कि ज़िंदगी खुद एक बहुत बड़ा मंच है और हम सब इसके कलाकार हैं। लेकिन क्या हम अपनी भूमिका अच्छे से निभा पा रहे हैं? आज हम सब मोबाइल की छोटी सी स्क्रीन में कैद हो गए हैं। घर में चार लोग साथ बैठते हैं, पर चारों के हाथ में फोन होता है। संवाद खत्म हो रहा है, संवेदनाएँ सूख रही हैं। यहीं पर रंगमंच की ज़रूरत महसूस होती है। इसलिए हम जनता और दर्शकों से सीधा संवाद कर रहे।

सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी के प्रतिनिधि और रंगमंच कलाकार अभिषेक सिंह ने चर्चा के दौरान कहा, "आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और मोबाइल की आभासी दुनिया में हम अपनों से दूर होते जा रहे हैं। रंगमंच हमें फिर से जीवंत संवेदनाओं से जोड़ता है। रंगमंच कलाकार नवनीत मिश्रा ने कहा कि यदि परिवार के सदस्य साथ मिलकर नाटक देखने की आदत डालें, तो इससे न केवल आपसी संवाद बढ़ेगा बल्कि बच्चों के मानसिक विकास में भी अभूतपूर्व सुधार होगा।"

कार्यक्रम में गोमती नगर के स्थानीय निवासियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी जिज्ञासाएँ शांत कीं। संस्था द्वारा लोगों को प्रेरित किया गया कि वे अपने बच्चों को रंगमंच की कार्यशालाओं (Workshops) से जोड़ें ताकि उनके भीतर के संकोच को दूर कर उन्हें एक आत्मविश्वासी नागरिक बनाया जा सके।

संस्था के अध्यक्ष श्री बी एन ओझा ने कहा  जैसे  चाय में अदरक और इलायची स्वाद बढ़ाती है, वैसे ही रंगमंच हमारी नीरस ज़िंदगी में स्वाद भर देता है।" नुक्कड़ टी स्टाल पर मौजूद युवाओं ने इशिका , प्रियंका , आयुषी, आशुतोष श्रीवास्तव, शुभम यादव , बादल सिंह राज्यवर्धन सिंह साक्षी व अन्य ने .इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए कहा कि अक्सर कला और रंगमंच की बातें बंद कमरों या ऑडिटोरियम तक सीमित रहती हैं, लेकिन इस तरह नुक्कड़ और चाय की दुकानों पर चर्चा होने से आम आदमी भी कला से जुड़ाव महसूस करता है।

अंत में, संस्था के सदस्य मनु , नवनीत , विनायक , सत्यम, अभिषेक , सौम्या ने सभी से अपील की कि वे स्थानीय रंगमंच और कलाकारों का समर्थन करें और साल में कम से कम कुछ समय अपने परिवार के साथ जीवंत नाटकों को देखने के लिए ज़रूर निकालें।

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