Skip to main content

चैत्र रामनवमी के सफल आयोजन को लेकर उच्च अधिकारियों ने की बैठक

अयोध्या से रवि मौर्य 

अयोध्या। चैत्र रामनवमी के सफल आयोजन के दृष्टिगत बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि परिसर के पी०एफ०सी० में एक विस्तृत ब्रीफिंग बैठक आयोजित की गई। बैठक में उच्च स्तरीय प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति रही, जिनमें अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार, मंडलायुक्त राजेश कुमार, डीआईजी सोमेन बर्मा, जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ गौरव ग्रोवर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

मंडलायुक्त राजेश कुमार ने रामनवमी पर्व के अवसर पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं के संबंध में भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं तथा फुटपाथों को खाली रखा जाए, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की समस्या न हो। संभावित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था करने तथा दर्शन-पूजन कार्यक्रम को स्क्रीन के माध्यम से भी प्रसारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रामनवमी अयोध्या के प्रमुख पर्वों में से एक है, श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने तथा संदिग्ध पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। मंदिर परिसर में बिना जांच के किसी को भी प्रवेश न दिए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने बताया कि रामनवमी के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं के अयोध्या आगमन की संभावना है। इसके लिए बैरिकेटिंग, पेयजल,विद्युत,चिकित्सा व एंटी ड्रोन सिस्टम आदि व्यवस्थाएं पहले से ही दुरुस्त कर दीजिए।

बैठक से पहले उच्च अधिकारियों ने मेला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य मेला परिसर में चल रही तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का जायजा लेना तथा श्रद्धालुओं/आगंतुकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना रहा। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, यातायात प्रबंधन एवं स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तृत रूप से अवलोकन किया। इसके साथ ही अधिकारियों ने मेला क्षेत्र में साफ-सफाई, कूड़ा निस्तारण, शौचालयों की उपलब्धता, पेयजल आपूर्ति, प्रकाश व्यवस्था तथा अस्थायी दुकानों एवं पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने हेतु पार्किंग स्थलों एवं मार्ग संकेतकों का भी निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए।

Comments

Popular posts from this blog

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

“अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी: उजड़ने की कगार पर संजय कॉलोनी भाटी माइंस”

जितेंद्र कुशवाहा दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित संजय कॉलोनी भाटी माइंस के लोग आज भी अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही कॉलोनी है, जिसे वर्ष 1976 में दिल्ली सरकार ने विधिवत बसाया था और यहां के निवासियों को पट्टे भी दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें एक स्थायी ठिकाना मिल गया है। लोग गांव से आए, मजदूरी की, और जीवनभर की कमाई लगाकर ईंट-पत्थर से अपने आशियाने खड़े किए। लेकिन 1991 में अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी ने यहां के निवासियों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया। अधिकारियों की एक गलत रिपोर्ट और अदूरदर्शी निर्णय के कारण पूरी कॉलोनी को रिज क्षेत्र (संरक्षित वन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि 15 साल पहले जिन घरों को कानूनी मान्यता दी गई थी, वे अचानक “अवैध” हो गए। आज हालात यह हैं कि सरकार और प्रशासन उन्हीं घरों को तोड़ने पर आमादा है, जिन पर लोगों ने अपना खून-पसीना बहाकर जीवन की पूंजी लगा दी थी। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए नव युवक ग्राम विकास समिति के सदस्य एवं ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ के संस्थापक समाज...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...