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भगवान परशुराम जी का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया

भगवान परशुराम जी के आदर्श समाज के लिए प्रेरणास्रोत :प्रो. रीता बहुगुणा जोशी

प्रमुख संवाददाता

लखनऊ लखनऊ कैंट क्षेत्र स्थित सहसोवीर मंदिर,कृष्णा नगर में भगवान परशुराम जी के पावन जन्मोत्सव एवं मंदिर निर्माण के 5 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भव्य भजन संध्या एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति के तत्वाधान में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूजन-अर्चन के साथ हुआ। मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों एवं विद्युत सज्जा से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और दिव्य हो उठा। भगवान परशुराम जी के विग्रह का विशेष श्रृंगार किया गया तथा विधि-विधान से आरती एवं भोग अर्पण किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आरती में भाग लेकर भगवान से सुख-समृद्धि एवं देश-प्रदेश की उन्नति की कामना की।

भगवान परशुराम जी के इस मंदिर का निर्माण प्रो. रीता बहुगुणा जोशी और उनके पुत्र मयंक जोशी के प्रयासों से कराया गया था, जो आज क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। मंदिर निर्माण के 5 वर्ष पूर्ण होने पर समिति द्वारा विशेष उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें भजन संध्या मुख्य आकर्षण रही।

कार्यक्रम में हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति की उपाध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री उ.प्र., प्रो. रीता बहुगुणा जोशी और मयंक जोशी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने भगवान परशुराम जी के आदर्शों-धर्म, साहस और न्याय को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं।

इस अवसर पर मेयर लखनऊ सुषमा खर्कवाल, अलका दास, निर्मला पंत,ऋचा जोशी और रेणुका टंडन सहित अनेक विशिष्ट जन उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने भगवान परशुराम जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा आयोजन की सराहना की।भजन संध्या में सुप्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक भजनों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे और “जय परशुराम” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंजता रहा।

कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। आयोजन की सुव्यवस्था एवं सफल संचालन के लिए समिति के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन क्षेत्र में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा।

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