गांधी भवन में उमड़ा भक्ति का सैलाब; चित्रा राय के भजनों और गुरुदेव के ध्यान से दिव्य हुआ वातावरण
प्रमुख संवाददाता
लखनऊ आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और वैश्विक आध्यात्मिक गुरु, परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के 70वें जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आज राजधानी के कैसरबाग स्थित गांधी भवन ऑडिटोरियम में 'दिव्य गान, ध्यान और ज्ञान' का एक अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में उमड़े भक्तों और साधकों ने सामूहिक प्रार्थना और सेवा के संकल्प के साथ गुरुदेव के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
भक्ति और संगीत का जादू
शाम 6:30 बजे प्रारंभ हुए इस उत्सव का मुख्य आकर्षण विश्व प्रसिद्ध भजन गायिका चित्रा राय जी की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति रही। जैसे ही उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में "मेरे सतगुरु की छवि ऐसी है, मोहे लागे मोहन जैसी है" गाना शुरू किया, पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों से गूंज उठा। संगीत की इस दिव्य धारा में भक्त झूमने पर मजबूर हो गए। वहीं, जब उन्होंने "मेरा मुझमें किछु नहीं, जो कुछ है सो तेरा" जैसे भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए, तो उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर हो गया और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक शांति में डूब गया।
सामूहिक ध्यान और गुरुदेव का सानिध्य
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के उपरांत, आर्ट ऑफ लिविंग के बेंगलुरु स्थित अंतरराष्ट्रीय केंद्र से गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के विशेष ध्यान सत्र का सीधा प्रसारण (Live Telecast) किया गया। गांधी भवन में उपस्थित हजारों साधकों ने एक साथ गहरे मौन और ध्यान का अनुभव किया। यह क्षण केवल एक जन्मोत्सव मात्र नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, करुणा और सामूहिक चेतना के जागरण का उत्सव प्रतीत हो रहा था।
गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, आध्यात्मिक साधक और आर्ट ऑफ लिविंग परिवार के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में आर्ट ऑफ लिविंग के एपेक्स मेंबर्स और वरिष्ठ शिक्षकों (फैकल्टी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनमें प्रमुख रूप से:
समर्थ नारायण, तनुज नारायण, नमिता उपाध्याय, नीरू शर्मा।
अंजलि सेठ, पूनम जैन, अर्चना सतीश, योगेश शर्मा।
अनिकेत जोशी, राजीव पाठक, मनीष गुप्ता, पवन, शिवम।
शेष गुप्ता, सीमा मोदी, अर्पण, गौरव सिंह, विशाल पांडेय।
अतुल भटनागर, मीता गुप्ता एवं अन्य वरिष्ठ साधक गण शामिल रहे।
समापन और प्रसाद वितरण
उत्सव का समापन महाआरती और विशेष प्रसाद वितरण के साथ हुआ। उपस्थित जनों ने गुरुदेव के 'तनाव मुक्त और हिंसा मुक्त समाज' के सपने को साकार करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को गुरुदेव के जन्मदिन की बधाई दी और इस अलौकिक अनुभव को अपने भीतर समेटे हुए विदा ली।


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