संघर्ष समिति ने मुख्य अभियंता को सौंपा ज्ञापन, दिया आंदोलन की चेतावनी
प्रमुख संवाददाता
लखनऊ। केंद्रीय कार्यशाला एवं आरआर विभाग के कर्मचारियों ने कार्यदायी संस्था द्वारा ईपीएफ और ईएसआई जैसी मूलभूत सुविधाएं न दिए जाने पर नाराजगी जताई है। समिति ने मुख्य अभियंता (वि०/याँ०) नगर निगम लखनऊ को पत्र भेजकर कार्यदायी संस्था पर कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। संघर्ष समिति ने बताया कि पूर्व में नगर निगम प्रशासन और समिति के बीच हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी थी , लेकिन आज तक उन समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। समिति के अनुसार श्रम विभाग के शासनादेश के तहत अकुशल कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की गई , जबकि कुशल एवं अर्धकुशल श्रमिकों का मानदेय अब तक नहीं बढ़ाया गया है। समिति ने मांग की है कि इस संबंध में प्रस्ताव तत्काल मा० सदन एवं कार्यकारिणी की बैठक में भेजा जाए, ताकि अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों को राहत मिल सके। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि 29 नवंबर 2025 को केंद्रीय कार्यशाला प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच हुई वार्ता में लक्ष्मी सिक्योरिटी एंड गार्ड सर्विसेज के निदेशक धर्मेंद्र सिंह उर्फ बउआ सिंह की मौजूदगी में 10 दिनों के भीतर कर्मचारियों के ईपीएफ की धनराशि यूएएन खातों में जमा कराने और सभी कर्मचारियों को ईएसआई कार्ड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। साथ ही इसकी सूची संघर्ष समिति को देने की भी बात कही गई थी, लेकिन आज तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। समिति के अनुसार संबंधित संस्था को लगभग 450 कर्मचारियों का ठेका दिया गया है, लेकिन कर्मचारियों की तैनाती, नाम, पता और मोबाइल नंबर सहित पूरी सूची भी संघर्ष समिति को उपलब्ध नहीं कराई गई है। समिति ने मांग की है कि कितने कर्मचारियों का ईपीएफ जमा किया गया, कितनों को ईएसआई कार्ड मिला और कितने कर्मचारी अभी भी इन सुविधाओं से वंचित हैं, इसकी विस्तृत सूची तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
संघर्ष समिति ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2018 से ही अन्य जोनों में कार्यदायी संस्थाओं द्वारा ईपीएफ और ईएसआई के नाम पर कर्मचारियों के धन में गड़बड़ी की जाती रही है। समिति ने कहा कि कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर शहर की सेवा करने वाले कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
समिति ने मांग की है कि संबंधित कार्यदायी संस्था को तत्काल बुलाकर बैठक की जाए और आपसी वार्ता के माध्यम से कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान कराया जाए। समिति ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन और शासन की होगी।

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